बांग्लादेश में यूनुस सरकार के खिलाफ उबाल, विदेशी कंपनियों को बंदरगाह सौंपने के फैसले पर देशभर में भूख हड़ताल

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चटगांव बंदरगाह को विदेशी कंपनी को सौंपने के फैसले के खिलाफ बांग्लादेश में भूख हड़ताल, यूनुस सरकार पर राष्ट्रीय हित से समझौते का आरोप

बांग्लादेश में अंतरिम प्रधानमंत्री मुहम्मद यूनुस की सरकार के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। चटगांव बंदरगाह को विदेशी संचालकों को पट्टे पर देने के फैसले के विरोध में शनिवार को सैकड़ों बंदरगाह कर्मचारियों ने सामूहिक भूख हड़ताल शुरू की।

श्रमिक कर्मचारी ओइक्या परिषद (एसकेओपी) के नेता अनवर हुसैन ने कहा कि सरकार का यह निर्णय “राष्ट्रीय हित के खिलाफ” है और इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

क्या है विवाद की वजह?
यह हड़ताल उस समय शुरू हुई जब यूनुस सरकार ने न्यू मूरिंग कंटेनर टर्मिनल (एनसीटी) को यूएई स्थित डीपी वर्ल्ड नामक कंपनी को पट्टे पर देने की योजना बनाई। कर्मचारियों का कहना है कि एनसीटी का निर्माण बांग्लादेशी संसाधनों और तकनीक से हुआ है और यह देश का सबसे सफल कंटेनर टर्मिनल बन चुका है। इसे विदेशी हाथों में देना “देश की संप्रभुता पर चोट” के समान है।

बंदरगाह की अहमियत और चिंता
चटगांव बंदरगाह बांग्लादेश की आर्थिक जीवनरेखा माना जाता है, क्योंकि देश का अधिकांश आयात-निर्यात इसी के जरिए होता है। बांग्लादेश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा परिधान निर्यातक देश है, और विशेषज्ञों का कहना है कि बंदरगाह का संचालन विदेशी कंपनियों को सौंपना राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यापार नियंत्रण के लिहाज से जोखिम भरा कदम हो सकता है।

सरकार का रुख
प्रधानमंत्री यूनुस ने पद संभालने के बाद कहा था कि बंगाल की खाड़ी के तट पर स्थित चटगांव बंदरगाह को “वैश्विक स्तर के ऑपरेटर” को सौंपना देश की व्यापारिक दक्षता और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए जरूरी है।
हालांकि, श्रमिक संगठनों का कहना है कि सरकार का यह फैसला “स्थानीय हितों को नजरअंदाज कर विदेशी कंपनियों को फायदा पहुंचाने” के उद्देश्य से लिया गया है। विरोध प्रदर्शन फिलहाल जारी है और कर्मचारी चेतावनी दे चुके हैं कि अगर सरकार ने फैसला वापस नहीं लिया, तो बंदरगाह संचालन पूरी तरह ठप कर दिया जाएगा।

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