इजरायल में नेतन्याहू की कुर्सी पर संकट गहराया, आइसेनकोट को 67 सांसदों का समर्थन; UTJ ने छोड़ा साथ

2

इजरायल में नई सरकार के गठन को लेकर पिछले एक सप्ताह से जारी राजनीतिक खींचतान गुरुवार देर शाम समाप्त होती नजर आई।

मध्यमार्गी गठबंधन के नेता और पूर्व सेना प्रमुख गादी आइसेनकोट को प्रधानमंत्री बनाने के लिए अरब दलों के गठबंधन ज्वाइंट लिस्ट ने अपना समर्थन दे दिया है। गठबंधन के 11 सांसदों के नेताओं ने राष्ट्रपति आइजक हरजोग से मुलाकात कर आइसेनकोट के समर्थन का औपचारिक पत्र सौंपा।

इससे पहले आठ सांसदों वाली अरब पार्टी राएम भी आइसेनकोट के पक्ष में समर्थन का ऐलान कर चुकी थी। दोनों का समर्थन मिलने के बाद आइसेनकोट के पक्ष में सांसदों की संख्या बढ़कर 67 हो गई है। इजरायल की 120 सदस्यीय संसद नीसेट में सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है।

चुनाव में आइसेनकोट के नेतृत्व वाले गठबंधन को 48 सीटें मिली थीं। वहीं, लंबे समय तक इजरायल के प्रधानमंत्री रहे बेंजामिन नेतन्याहू इस बार सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत जुटाने में नाकाम रहे। 27 अक्टूबर को हुए चुनाव में उनके नेतृत्व वाले दक्षिणपंथी गठबंधन को 53 सीटें मिली थीं, लेकिन उसे अन्य दलों का समर्थन नहीं मिल सका।

नेतन्याहू की मुश्किलें उस समय और बढ़ गईं, जब उनके गठबंधन में शामिल सात सांसदों वाली यूनाइटेड टोरा जूडिज्म (यूटीजेड) ने गुरुवार को अलग होने का ऐलान कर दिया। पार्टी ने फिलहाल संसद में स्वतंत्र रूप से बैठने का निर्णय लिया है। इस घटनाक्रम के बाद नेतन्याहू के खेमे में सांसदों की संख्या घटकर 46 रह गई है।

नई सरकार के गठन को लेकर आइसेनकोट और ज्वाइंट लिस्ट के नेताओं के बीच हुई बातचीत में कई अहम नीतिगत मुद्दों पर सहमति बनी। आइसेनकोट ने स्पष्ट किया कि इजरायल को यहूदी राष्ट्र के रूप में बनाए रखते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत सरकार चलाई जाएगी। इसके अलावा हमास को आतंकवादी संगठन मानते हुए उसकी सैन्य क्षमता समाप्त करने की नीति जारी रखने पर भी सहमति बनी।

बातचीत में सेना में सभी नागरिकों की अनिवार्य भर्ती से जुड़े नियमों में बदलाव और देश की स्थापना के समय नागरिक अधिकारों के लिए निर्धारित सिद्धांतों का पालन करने जैसे मुद्दे भी शामिल रहे।

इन शर्तों पर सहमति बनने के बाद ज्वाइंट लिस्ट के नेताओं ने राष्ट्रपति हरजोग को आइसेनकोट के समर्थन का पत्र सौंपा। ज्वाइंट लिस्ट में हदाश, ताल और बलद तीन अरब पार्टियां शामिल हैं। वहीं, राएम ने गठबंधन से अलग रहकर चुनाव लड़ा था।

Comments are closed.