बिहार में बाढ़ का खतरा बढ़ने के साथ जिला प्रशासन ने राहत और बचाव कार्यों की तैयारियां तेज कर दी हैं।
निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में आवाजाही के लिए 66 निशुल्क नावें तैनात की गई हैं। वहीं, राहत शिविरों में सामुदायिक रसोई के साथ पेयजल, शौचालय, रोशनी और दवाओं की व्यवस्था की जा रही है।
बाढ़ प्रभावित पशुओं के लिए भी अलग शिविर बनाए गए हैं। इन शिविरों में पशुओं के लिए चारा, जरूरी दवाएं और उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत संबंधित अधिकारियों या हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दें।
पानी में फंसे हैं तो क्या करें?
अगर कोई व्यक्ति बाढ़ के पानी में फंस गया है या किसी जरूरी काम से बाहर निकलना पड़ रहा है, तो प्रशासन की ओर से संचालित सुरक्षित नाव या एसडीआरएफ की मोटरबोट का ही इस्तेमाल करें। छोटी नाव या डेंगी से पानी पार करने की कोशिश न करें। आपात स्थिति में 1070 पर, संबंधित अंचलाधिकारी (CO) या प्रखंड नियंत्रण कक्ष में सूचना दें।
राहत शिविरों में मिलेंगी जरूरी सुविधाएं
निचले इलाकों से विस्थापित लोगों के लिए बाढ़ और दानापुर अंचल में एक-एक तथा पाटलिपुत्र अंचल में दो राहत शिविर शुरू किए गए हैं। यहां भोजन, पेयजल, शौचालय, रोशनी और दवाओं समेत आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
सर्पदंश या कुत्ते के काटने पर तुरंत कराएं इलाज
बाढ़ के दौरान सर्पदंश या कुत्ते के काटने की स्थिति में लोग राहत शिविरों के पास बनाए गए मेडिकल कैंप में जाकर इलाज करा सकते हैं। गंभीर स्थिति होने पर स्थानीय प्रशासन या बचाव दल को तुरंत सूचना देने की सलाह दी गई है।
पशुओं को बाढ़ के पानी में न छोड़ें
अगर पशुओं के लिए चारे की समस्या हो रही है तो उन्हें बाढ़ के पानी में खुला छोड़ने के बजाय प्रशासन द्वारा बनाए गए पशु शिविरों में ले जाएं। बाढ़ और पाटलिपुत्र अंचल में दो-दो तथा दानापुर अंचल में एक पशु शिविर शुरू किया गया है। यहां चारा, जरूरी दवाएं और उपचार की व्यवस्था की गई है।
इन इलाकों में तैनात हैं 66 निशुल्क नावें
अथमलगोला, बख्तियारपुर, बाढ़, दानापुर, फतुहा, मनेर, पाटलिपुत्र और पुनपुन में कुल 66 निशुल्क नावें तैनात की गई हैं। बाढ़ प्रभावित लोग इन नावों का सुरक्षित आवागमन के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
इन घाटों पर एसडीआरएफ की मोटरबोट तैनात
एसडीआरएफ की मोटरबोट उमानाथ घाट और अलखनाथ घाट, बख्तियारपुर, एनआईटी घाट, गांधी घाट, कंगन घाट, दीघा घाट, जेपी सेतु के पूर्वी और पश्चिमी घाट, नासरी घाट, दानापुर पीपा पुल घाट और मनेर अंचल में तैनात की गई हैं। इसके अलावा दो मोटरबोट को रिजर्व रखा गया है।
तटबंध में कटाव या रिसाव दिखे तो तुरंत दें सूचना
तटबंध में कटाव, रिसाव या टूटने की स्थिति में लोग खुद मरम्मत करने या मौके पर भीड़ लगाने के बजाय तत्काल स्थानीय CO, प्रखंड प्रशासन या जिला प्रशासन को सूचना दें। किसी गंभीर या तत्काल खतरे की स्थिति में 1070 पर संपर्क करें।
24 घंटे उपलब्ध हेल्पलाइन नंबर
राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र: 1070
जिला नियंत्रण कक्ष: 0612-2210118, 8235449748
- बाढ़ प्रभावित लोग इन बातों का रखें ध्यान
- पानी बढ़ने पर नदी या जलमग्न इलाकों में जाने से बचें।
- बच्चों को नदी, नहर, तालाब और बाढ़ के पानी से दूर रखें।
- प्रशासन की सुरक्षित नाव या मोटरबोट के बिना पानी पार करने की कोशिश न करें।
- अफवाह या अपुष्ट संदेशों के आधार पर घर छोड़ने का फैसला न करें।
- किसी भी आपात स्थिति में तुरंत 1070 या जिला नियंत्रण कक्ष को सूचना दें।
प्रशासन ने सभी संवेदनशील तटबंधों पर 24 घंटे निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी भी संभावित खतरे की स्थिति में समय रहते राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सके।
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