रेलवे भर्ती में फिर फर्जीवाड़ा, 7 दिन में दोबारा पकड़ा गया डमी अभ्यर्थी; 2 सितंबर के बाद फिर खुली पोल
रेलवे ग्रुप डी और लेवल-1 भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) में डमी अभ्यर्थियों के जरिए फर्जीवाड़े के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
छह सितंबर को बिहार के दो युवकों के वास्तविक अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने का मामला सामने आने के महज तीन दिन बाद बुधवार को फिर फर्जीवाड़ा पकड़ा गया।
इस बार उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के तीन युवक दूसरे अभ्यर्थियों की जगह पीईटी देने पहुंचे थे। रेटिना टेस्ट और फोटो रिकॉर्ड के मिलान के दौरान उनकी पहचान में गड़बड़ी सामने आई। इसके बाद तीनों को पकड़कर जीआरपी के हवाले कर दिया गया।
पकड़े गए युवकों में फिरोजाबाद के जफराबाद गांव निवासी 21 वर्षीय गौरव यादव, अलीनगर निवासी 33 वर्षीय पंकज यादव और बावली गांव निवासी 20 वर्षीय अनुज शामिल हैं। रेलवे भर्ती प्रकोष्ठ पश्चिम रेलवे के दीपक तिवारी के मुताबिक, जांच में सामने आया कि गौरव वास्तविक अभ्यर्थी अनुज दिवाकर की जगह परीक्षा दे रहा था, जबकि पंकज मनीष के स्थान पर पीईटी में शामिल हुआ था।
जांच में यह भी सामने आया कि पंकज यादव और गौरव यादव दो सितंबर को भी इन्हीं अभ्यर्थियों की जगह पीईटी दे चुके थे। उस समय वे पहचान सत्यापन प्रक्रिया में नहीं पकड़े गए। इसके चलते रेलवे की पहचान और सत्यापन व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
फिरोजाबाद निवासी 26 वर्षीय मनीष सिंह, जिसके स्थान पर पंकज परीक्षा दे रहा था, पीईटी में शामिल होने के लिए रतलाम नहीं पहुंचा और फिलहाल फरार बताया जा रहा है।
50 हजार रुपये में तय हुआ था सौदा
पूछताछ में पता चला कि पंकज यादव इससे पहले हैदराबाद में आयोजित ग्रुप डी की लिखित परीक्षा में भी मनीष के स्थान पर बैठ चुका था। पीईटी में उसकी जगह परीक्षा देने के लिए 50 हजार रुपये में सौदा तय हुआ था। इसके लिए पंकज हैदराबाद से फ्लाइट के जरिए इंदौर पहुंचा और वहां से रतलाम गया।
रतलाम पहुंचने के बाद पंकज समेत तीनों युवक रेलवे स्टेशन क्षेत्र के एक होटल में ठहरे थे। पुलिस के अनुसार, तीनों एक-दूसरे को पहले से जानते थे।
वहीं, गौरव यादव ने अनुज दिवाकर के स्थान पर पीईटी देने के लिए कोई रकम नहीं ली थी। पूछताछ में सामने आया कि दोनों आपस में परिचित हैं और इसी वजह से गौरव ने उसके स्थान पर परीक्षा देने के लिए पैसे नहीं लिए।
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