UNSC ने ट्रंप की गाजा शांति योजना को मिली मंजूरी — इंटरनेशनल फोर्स की तैनाती का रास्ता साफ़
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा शांति योजना का समर्थन करने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। यह प्रस्ताव 13 वोटों के साथ पास हुआ, जबकि रूस और चीन (सही: रूस और यूक्रेन) ने न तो इसका समर्थन किया और न ही वीटो किया—दोनों मतदान के दौरान अनुपस्थित रहे।
प्रस्ताव में गाजा में एक अंतरराष्ट्रीय बल तैनात करने, क्षेत्र को विसैन्यीकृत करने और भविष्य में संभावित फिलिस्तीनी राष्ट्र के लिए एक ढांचा तैयार करने की बात शामिल है।
ट्रंप ने फैसले को बताया ‘ऐतिहासिक’
वोटिंग के बाद ट्रंप ने अपने प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर लिखा कि यह निर्णय “संयुक्त राष्ट्र इतिहास के सबसे बड़े अप्रूवल में से एक” के रूप में याद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस शांति बोर्ड की अध्यक्षता वे स्वयं करेंगे, जिसमें दुनिया के “सबसे प्रभावशाली नेता” शामिल होंगे।
अमेरिका के UN राजदूत माइक वाल्ट्ज ने कहा कि यह प्रस्ताव गाजा में स्थिरता लाने और इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में “एक महत्वपूर्ण कदम” है।
गाजा में इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स (ISF) तैनात होगी
प्रस्ताव ट्रंप की शांति योजना का समर्थन करता है, जिसने 10 अक्टूबर को इजरायल-हमास संघर्ष में सीजफायर लागू किया था। योजना के मुताबिक:
इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स (ISF) गठित की जाएगी
यह इजरायल, मिस्र और प्रशिक्षित फिलिस्तीनी पुलिस के साथ मिलकर काम करेगी
ISF का काम होगा:
- सीमा क्षेत्रों को सुरक्षित करना
- गाजा को विसैन्यीकृत करना
- गैर-राज्य सशस्त्र समूहों से हथियार हटाना
- नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना
- मानवीय गलियारों को सुरक्षित रखना
फिलिस्तीन के भविष्य के देश की ओर ‘संकेत’, लेकिन स्पष्टता नहीं
प्रस्ताव में एक “शांति बोर्ड” बनाने का भी प्रावधान है, जिसकी अध्यक्षता ट्रंप करेंगे और यह 2027 तक काम करेगा। यह एक तरह की संक्रमणकालीन सरकार जैसा ढांचा होगा।
AP के अनुसार प्रस्ताव में जटिल भाषा में संकेत दिया गया है कि—
जब फिलिस्तीनी प्राधिकरण आवश्यक सुधार पूरे कर लेगा और गाजा का पुनर्निर्माण शुरू होगा,
तब फिलिस्तीनी आत्मनिर्णय और राज्य बनने के लिए एक ‘विश्वसनीय मार्ग’ बन सकता है।
हालांकि इस दिशा में कोई स्पष्ट टाइमलाइन, प्रक्रिया या ठोस प्रावधान नहीं दिया गया है।
हमास ने किया प्रस्ताव का विरोध
गाजा पर शासन करने वाले हमास ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। समूह का कहना है कि यह प्रस्ताव
“फिलिस्तीनी लोगों की राजनीतिक और मानवीय मांगों को पूरा करने में विफल” है।
हमास का आरोप है कि इसमें फिलिस्तीनियों के मूल हितों और अधिकारों को प्राथमिकता नहीं दी गई है, इसलिए वह इस योजना को स्वीकार नहीं कर सकता।
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