इज़रायल ने गाज़ा शहर पर कब्ज़े की योजना को अमल में लाना शुरू कर दिया है।
सेना ने अपने सैन्य अभियान का पहला चरण शुरू करते हुए ज़िटौन और जबालिया इलाक़ों में ज़मीनी हमलों की तैयारी तेज़ कर दी है। इज़रायली सेना के प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि यह अभियान गाज़ा पर पूर्ण नियंत्रण की दिशा में अहम कदम है।
करीब दो साल से जारी इज़रायल-हमास युद्ध का यह नया अध्याय है, जिससे गाज़ा में पहले से बिगड़े मानवीय हालात और गंभीर हो सकते हैं। लाखों फ़िलिस्तीनियों के विस्थापन का खतरा मंडरा रहा है।
इससे एक दिन पहले इज़रायल के रक्षा मंत्री ने गाज़ा शहर पर कब्ज़े की योजना को मंज़ूरी दी थी। इस ऑपरेशन के लिए लगभग 60,000 रिज़र्विस्टों को बुलाया जा रहा है।
हमास ने इज़रायल पर आरोप लगाया है कि वह युद्धविराम समझौते को बाधित कर “निर्दोष नागरिकों के खिलाफ क्रूर युद्ध” जारी रखना चाहता है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इज़रायल की योजना की आलोचना हो रही है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने चेतावनी दी कि यह कदम “पूरे क्षेत्र को स्थायी युद्ध के चक्र में झोंक सकता है।”
रेड क्रॉस ने भी कहा है कि विस्थापन और हमलों की बढ़ती तीव्रता से गाज़ा की 21 लाख आबादी के लिए हालात और बिगड़ सकते हैं।
मध्यस्थ देशों ने युद्धविराम और बंधक रिहाई का नया प्रस्ताव दिया था जिसे हमास ने मंज़ूरी दी, लेकिन इज़रायल ने इसके बजाय अपने सैन्य अभियान को आगे बढ़ाने का फ़ैसला किया है।
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