रोमांच महाजन के नाम पर अमेरिका में बना कानून, न्यूयॉर्क में घोड़ा-बग्गियों पर लगेगी रोक
अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में पठानकोट निवासी रोमांच महाजन की याद में एक नया कानून पारित किया गया है। सेंट्रल पार्क में हुए एक दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वाले 18 वर्षीय रोमांच के सम्मान में अब ‘राइडर लॉ’ को ‘रोमांच लॉ’ के नाम से जाना जाएगा। इस कानून के लागू होने के साथ ही न्यूयॉर्क की सड़कों पर पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रही पारंपरिक घोड़ा-बग्गियों पर प्रतिबंध लगाने का रास्ता साफ हो गया है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, विधेयक को सिटी काउंसिल में 40 सदस्यों का समर्थन मिला, जबकि सात सदस्यों ने इसके खिलाफ मतदान किया। दो सदस्य मतदान से अनुपस्थित रहे। रोमांच के परिवार के अनुसार, वह अमेरिका में कानून के नाम से सम्मानित होने वाले पहले भारतीय हैं।
मां को बचाने की कोशिश में गई रोमांच की जान
रोमांच महाजन अपने परिवार के साथ अमेरिका घूमने गए थे। इसी दौरान न्यूयॉर्क के सेंट्रल पार्क में वह एक घोड़ा-बग्गी में सवार थे। अचानक घोड़ा बिदक गया और बग्गी को लेकर तेजी से भागने लगा। इस दौरान रोमांच की मां प्रिया महाजन बग्गी से नीचे गिर गईं।
मां को बचाने के लिए रोमांच ने भी बग्गी से छलांग लगा दी। हादसे में प्रिया को मामूली चोटें आईं, लेकिन रोमांच के सिर में गंभीर चोट लगी, जिसके कारण उसकी मौत हो गई। इस घटना ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
हादसे के बाद न्यूयॉर्क में घोड़ा-बग्गियों के संचालन को लेकर बहस तेज हो गई। कई सामाजिक संगठनों और नेताओं ने इस उद्योग पर रोक लगाने की मांग उठाई। इसी दौरान कानून का नाम रोमांच की स्मृति में रखने की मांग को भी समर्थन मिला।
सिटी काउंसिल में पारित हुआ ‘रोमांच लॉ’
रोमांच के पिता दीपक महाजन के अनुसार, न्यूयॉर्क सिटी काउंसिल में विधेयक को काउंसिल सदस्य क्रिस्टोफर मार्टे ने पेश किया था। उन्होंने बताया कि मेयर जोहरान ममदानी और स्पीकर जूली मेनिन की सहमति के बाद विधेयक को बहुमत से पारित किया गया।
दीपक महाजन ने बताया कि गुरुवार देर रात सिटी काउंसिल में रोमांच की स्मृति में मौन रखा गया। इसके बाद विधेयक पारित हुआ और राइडर लॉ को रोमांच लॉ के नाम से पहचान मिली।
घोड़ा-बग्गियों पर प्रतिबंध के पक्ष में समर्थन
रिपोर्ट में उद्धृत सर्वेक्षणों के अनुसार, न्यूयॉर्क के करीब 70 प्रतिशत निवासी घोड़ा-बग्गी उद्योग को बंद करने के पक्ष में हैं। इस उद्योग का विरोध करने वाले संगठनों का कहना है कि घोड़ों को भीषण गर्मी और कड़ाके की ठंड में कंक्रीट की सड़कों पर काम करना पड़ता है। इससे उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और सांस संबंधी समस्याओं तथा पैरों की बीमारियों का खतरा बढ़ता है।
घोड़ा-बग्गियों के संचालन के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं और वाहनों से निकलने वाले धुएं को लेकर भी चिंता जताई जाती रही है। रोमांच की मौत के बाद इस मुद्दे पर कार्रवाई की मांग को और बल मिला।
PETA ने भी रोमांच को दिया विशेष सम्मान
रोमांच महाजन को मरणोपरांत पशु अधिकार संगठन PETA की ओर से भी सम्मानित किए जाने की जानकारी सामने आई है। संगठन ने अपने मुख्यालय स्थित ‘ट्री ऑफ लाइफ’ स्मारक में उनकी स्मृति में एक विशेष पत्ती समर्पित करने का फैसला किया है।
PETA यानी पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स दुनिया के प्रमुख पशु अधिकार संगठनों में से एक है। रोमांच के परिवार के अनुसार, यह सम्मान पाने वाले वह पहले भारतीय हैं।
‘हादसे का दर्द कभी खत्म नहीं होगा’
रोमांच के पिता दीपक महाजन ने कहा कि बेटे को खोने का दर्द उनके परिवार के लिए कभी खत्म नहीं होगा। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकारों और सामाजिक संगठनों की ओर से इस मामले में दिखाई जा रही गंभीरता से भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने और लोगों की जान बचाने में मदद मिलेगी।
दीपक महाजन के मुताबिक, रोमांच के हादसे के बाद मिस्र, बॉम्बे, बेल्जियम, स्पेन, इटली और पराग्वे में भी घोड़ा-गाड़ियों पर प्रतिबंध लगाए जाने की जानकारी मिली है।
रोमांच की स्मृति में न्यूयॉर्क में कानून का नाम बदलना और PETA के ‘ट्री ऑफ लाइफ’ स्मारक में उन्हें स्थान दिया जाना उनके परिवार के लिए भावनात्मक महत्व रखता है। यह घटना घोड़ा-बग्गियों की सुरक्षा, पशु कल्याण और सार्वजनिक स्थानों पर जोखिम कम करने को लेकर जारी बहस को भी सामने लाती है।
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