UGC कानून 2026 के विरोध में इस्तीफा देने पर बड़ी कार्रवाई, सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री सस्पेंड

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उत्तर प्रदेश के बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देकर अलंकार अग्निहोत्री ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है।

उन्होंने यूजीसी कानून 2026 के विरोध और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े मुद्दे को लेकर इस्तीफा देने का दावा किया। इस्तीफे के बाद सोमवार देर रात की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। अलंकार अग्निहोत्री ने दावा किया कि उन्हें बरेली के जिलाधिकारी ने अपने आवास पर बातचीत के लिए बुलाया, जहां उन्हें करीब 45 मिनट तक रोके रखा गया। उन्होंने इसे अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए सरकारी आवास खाली करने का फैसला लेने की बात कही।

डीएम आवास पर क्या हुआ?

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा कि जब वह डीएम आवास पहुंचे, उस वक्त एसएसपी अनुराग आर्या मौजूद नहीं थे। बाद में डीएम ने फोन कर एसएसपी को भी बुला लिया। इस दौरान उनके साथ आए सचिव और अन्य लोगों को बाहर बैठा दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान मूल मुद्दों को भटकाने की कोशिश की गई।

अलंकार अग्निहोत्री का कहना है कि उन्हें यह दर्शाने का प्रयास किया गया कि उन्होंने एसआईआर (SIR) कार्य के दबाव में इस्तीफा दिया है और कुछ दिनों की छुट्टी पर जा रहे हैं, जबकि सच्चाई यह नहीं है।

इस्तीफा मंजूर नहीं, निलंबन

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सरकार की ओर से बड़ा फैसला लिया गया है। अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है। इसके बजाय उन्हें निलंबित करते हुए डीएम शामली कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। मामले की जांच के आदेश भी जारी किए गए हैं। बरेली मंडलायुक्त को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

यूजीसी कानून 2026 को लेकर विरोध क्यों?

यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के उद्देश्य से ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम 2026’ लागू किए हैं। इसके तहत विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में समानता प्रकोष्ठ बनाए जाएंगे, जहां एससी, एसटी, ओबीसी वर्ग के छात्र, शिक्षक और कर्मचारी भेदभाव की शिकायत दर्ज करा सकेंगे।

हालांकि, सवर्ण संगठनों का एक वर्ग इस कानून को असमानता बढ़ाने वाला बता रहा है और इसके दुरुपयोग की आशंका जता रहा है। इसी विरोध के बीच सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे ने विवाद को और हवा दे दी है।

‘छुट्टी लेने का दबाव’

अलंकार अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि डीएम आवास पर उन्हें तरह-तरह के प्रलोभन दिए गए और कहा गया कि वह तीन-चार दिन की छुट्टी ले लें। उनका कहना है कि बातचीत का उद्देश्य इस्तीफे की वजह को बदलकर पेश करना था।

उन्होंने स्पष्ट किया कि एसआईआर का काम पहले ही पूरा हो चुका है और केवल नोटिस की प्रक्रिया चल रही है। इसके बावजूद मामले को अलग दिशा में मोड़ने की कोशिश की गई।

सचिव को किया फोन, फिर छोड़ा गया

सिटी मजिस्ट्रेट ने दावा किया कि कथित तौर पर रोके जाने की जानकारी उन्होंने अपने सचिव दीपक पांडेय को फोन कर दी। इसके बाद जब यह बात बाहर आई और मीडिया तक पहुंची, तो उन्हें वहां से जाने दिया गया।

भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि अगर सचिव उनके साथ नहीं होते तो कोई अप्रिय घटना हो सकती थी। सुरक्षा को लेकर आशंका जताते हुए उन्होंने सरकारी आवास खाली करने का फैसला लिया।

राज्यपाल और राष्ट्रपति से अपील

अलंकार अग्निहोत्री ने राज्यपाल और राष्ट्रपति से अपील करते हुए कहा कि हालात डर पैदा करने वाले हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस्तीफे के बाद उनसे बयान बदलवाने की कोशिश की गई और उन्हें जान का खतरा महसूस हो रहा है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद देर रात उन्होंने अपना सामान गाड़ी में लदवाकर सरकारी आवास खाली कर दिया। इस दौरान मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा।

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