बांबे हाई कोर्ट ने मंगलवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ 2018 में की गई कथित ‘चोरों का सरदार’ टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में जारी समन को रद्द करने की मांग की थी।
न्यायमूर्ति एनआर बोरकर की एकल पीठ ने गिरगांव मजिस्ट्रेट की ओर से जारी आदेश को चुनौती देने वाली राहुल गांधी की याचिका पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। हालांकि, हाई कोर्ट ने 2021 के अपने उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें मजिस्ट्रेट को शिकायत पर छह सप्ताह तक आगे की सुनवाई नहीं करने का निर्देश दिया गया था। इसका उद्देश्य राहुल गांधी को फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का अवसर देना था।
अदालत ने कहा कि मजिस्ट्रेट के आदेश में उसे कोई कानूनी खामी या अनियमितता नजर नहीं आई। पीठ ने स्पष्ट किया कि आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है और इसी के साथ याचिका खारिज कर दी।
2019 के मजिस्ट्रेट आदेश को दी थी चुनौती
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गिरगांव मजिस्ट्रेट के 28 अगस्त, 2019 के आदेश को चुनौती दी थी। इस आदेश में उनके खिलाफ दायर मानहानि शिकायत पर आपराधिक प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया था।
यह शिकायत एमएच श्रीश्रीमल ने दायर की थी। उन्होंने खुद को सत्तारूढ़ भाजपा का कार्यकर्ता बताया था। शिकायत 2018 में राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर प्रधानमंत्री मोदी पर राहुल गांधी की कथित टिप्पणी के संदर्भ में दर्ज की गई थी।
शिकायतकर्ता का आरोप था कि राहुल गांधी ने सितंबर 2018 में राजस्थान में एक जनसभा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के लिए ‘चोरों का सरदार’ शब्द का इस्तेमाल किया था।
याचिका में शिकायत को बताया गया निराधार
राहुल गांधी की ओर से पेश अधिवक्ता सुदीप पसबोला और कुशल मोर ने दलील दी कि मानहानि की शिकायत निराधार है और शिकायतकर्ता के पास इसे दायर करने का वैध कानूनी आधार नहीं था।
वहीं, श्रीश्रीमल ने अपनी शिकायत में राहुल गांधी के ‘एक्स’ अकाउंट पर पोस्ट किए गए एक वीडियो का भी उल्लेख किया था। शिकायतकर्ता के मुताबिक, वीडियो में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए ‘कमांडर-इन-थीफ’ शब्द का इस्तेमाल किया था।
श्रीश्रीमल ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी की इन टिप्पणियों से प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा से जुड़े लोगों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। उन्होंने हाई कोर्ट में राहुल गांधी की याचिका का विरोध किया था।
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