हूतियों के बढ़ते खतरे के बीच सऊदी अरब की मदद की अपील, फ्रांस-ब्रिटेन और पाकिस्तान से मांगी सैन्य सहायता

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यमन के हूती विद्रोहियों के साथ बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब ने अपनी हवाई सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सहयोगी देशों से मदद मांगी है।

दो क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, सऊदी अरब ने हूती और अन्य ईरान समर्थित समूहों के मिसाइल और ड्रोन हमलों से निपटने के लिए फ्रांस, ब्रिटेन, पाकिस्तान और मिस्र से एयर डिफेंस सपोर्ट की अपील की है।

अधिकारियों के मुताबिक, सऊदी अरब के पास मिसाइल और ड्रोन को रोकने वाले इंटरसेप्टर सिस्टम पर दबाव बढ़ रहा है। अमेरिका भी इस समय ईरान के साथ जारी युद्ध के कारण इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी का सामना कर रहा है। ऐसे में रियाद अपनी सुरक्षा जरूरतों के लिए अन्य साझेदारों से सहयोग लेने की कोशिश कर रहा है।

इसी बीच हूतियों ने दावा किया कि उन्होंने यमन के मारीब प्रांत में सऊदी अरब के एक F-15 लड़ाकू विमान को मार गिराया। हूती प्रवक्ता याह्या सारी ने दावा किया कि विमान को स्थानीय रूप से निर्मित एयर-टू-एयर मिसाइल से निशाना बनाया गया। संगठन ने कथित घटना का करीब चार मिनट लंबा वीडियो भी जारी किया, जिसमें विमान को निशाना बनाए जाने और मलबे में आग लगने के दृश्य दिखाई देते हैं। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने इस दावे पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

बुधवार को सऊदी अरब ने यह भी आरोप लगाया कि हूतियों ने मक्का की ओर ड्रोन भेजने की कोशिश की, जिसे सऊदी रॉयल एयर डिफेंस ने रोककर नष्ट कर दिया। रियाद ने मक्का को अपनी सुरक्षा के लिए संवेदनशील क्षेत्र बताते हुए चेतावनी दी। हालांकि, हूतियों ने सऊदी अरब के इस दावे को खारिज कर दिया।

ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच हूती गतिविधियों ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है। लाल सागर में जहाजों को निशाना बनाए जाने के साथ सऊदी अरब के बुनियादी ढांचे पर भी हमलों की आशंका बढ़ी है। एक महत्वपूर्ण सऊदी तेल पाइपलाइन पर हमले के बाद उसके संचालन पर भी असर पड़ा है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से ऊपर बनी हुई हैं।

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