सुप्रीम कोर्ट ने एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉक्टरों के लिए अनिवार्य ग्रामीण सेवा की व्यवस्था पर नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) को विचार करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने आयोग से इस मुद्दे की समीक्षा कर उचित पहल करने को कहा है। बुधवार को न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने इस संबंध में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्देश जारी किया। पीठ ने कहा कि एनएमसी को एमबीबीएस पाठ्यक्रम पूरा करने वाले डॉक्टरों के लिए अनिवार्य ग्रामीण सेवा के प्रावधान की जांच करनी चाहिए।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 8 दिसंबर की तारीख निर्धारित की है।
इस मामले की पृष्ठभूमि में मई 2024 का घटनाक्रम भी जुड़ा है, जब सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के एक डीम्ड विश्वविद्यालय की निजी सीटों से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने वाले कुछ छात्रों की याचिका पर सुनवाई करने की सहमति दी थी।
याचिकाकर्ताओं ने कर्नाटक सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सेवा आयुक्त के खिलाफ राहत की मांग की है। उनका कहना है कि अनिवार्य ग्रामीण सेवा से संबंधित शपथ-पत्र जमा करने के लिए बाध्य किए बिना उन्हें आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी किया जाना चाहिए।
अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद एनएमसी इस बात की जांच करेगा कि एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने वाले डॉक्टरों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में अनिवार्य सेवा की व्यवस्था को किस तरह लागू किया जाना चाहिए।
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