ईरान युद्ध को लेकर बढ़ते मतभेदों के बीच अमेरिका और यूरोप के रिश्तों में तनाव साफ दिखने लगा है।
Donald Trump और Friedrich Merz के बीच तीखी बयानबाजी के बाद अमेरिका ने नाटो सहयोगी Germany से 5,000 सैनिकों को वापस बुलाने का फैसला किया है। इसकी पुष्टि Pentagon ने की।
ट्रंप-मर्ज टकराव से बढ़ी दूरी
बताया जा रहा है कि इस हफ्ते की शुरुआत में दोनों नेताओं के बीच ईरान युद्ध को लेकर तीखी बहस हुई थी। इसके बाद ट्रंप ने जर्मनी में तैनात अमेरिकी सैनिकों की संख्या घटाने की चेतावनी दी थी।
मर्ज ने कहा था कि दो महीने से जारी संघर्ष को खत्म करने की कोशिशों के दौरान ईरान अमेरिका को “अपमानित” कर रहा है। इस पर ट्रंप ने पलटवार करते हुए कहा कि मर्ज को स्थिति की सही समझ नहीं है।
सार्वजनिक मंचों पर तीखी बयानबाजी
व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने मर्ज पर सीधा हमला बोलते हुए जर्मनी की ऊर्जा और प्रवासन नीतियों की आलोचना की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मर्ज Russia-Ukraine War को खत्म कराने में नाकाम रहे हैं और उनकी नीतियों से यूक्रेन और मुश्किल में फंसा है।
नाटो और रणनीतिक असर
जर्मनी में तैनात अमेरिकी सैनिक NATO की सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं। ऐसे में सैनिकों की वापसी का फैसला ट्रांस-अटलांटिक संबंधों पर असर डाल सकता है।
हालांकि, मर्ज ने एक सैन्य अड्डे पर अपने संबोधन में नाटो गठबंधन की अहमियत दोहराई और सहयोगी देशों के साथ मजबूत संबंध बनाए रखने की बात कही। उन्होंने Strait of Hormuz को फिर से खोलने के लिए सहयोग का भी संकेत दिया।
होर्मुज संकट का वैश्विक असर
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम है, जहां से दुनिया के करीब 20% कच्चे तेल की आवाजाही होती है। मौजूदा तनाव के कारण इस मार्ग पर बाधा बनी हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार और कूटनीतिक समीकरण दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
इस घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि ईरान युद्ध केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन और पश्चिमी गठबंधनों के भीतर भी दरार पैदा कर रहा है।
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