अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है।
दोनों देशों के बीच किसी संभावित समझौते या स्थायी शांति की उम्मीदों को झटका लगा है, क्योंकि अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने ईरान से जुड़े समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा खतरे के जवाब में सैन्य कार्रवाई की है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य की दिशा में भेजे गए चार ईरानी ‘वन-वे अटैक ड्रोन’ को अमेरिकी बलों ने मार गिराया। CENTCOM ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि इन ड्रोन से समुद्री यातायात को तत्काल खतरा था। इसके बाद संभावित हमलों को रोकने के लिए अमेरिकी सेना ने गोरुक और केशम द्वीप स्थित ईरानी तटीय निगरानी रडार ठिकानों को निशाना बनाया।
CENTCOM ने कहा कि क्षेत्र में तैनात अमेरिकी बल पूरी तरह सतर्क हैं और आत्मरक्षा में किसी भी संभावित हमले का जवाब देने के लिए तैयार हैं। इस कार्रवाई ने पहले से तनावपूर्ण हालात को और संवेदनशील बना दिया है।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वीकार किया है कि हालिया सैन्य कार्रवाइयों के बावजूद ईरान की सैन्य क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। NBC News को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि ईरान की अधिकांश ड्रोन फैक्ट्रियां, लॉन्चिंग पैड और मिसाइल उत्पादन सुविधाएं प्रभावित हुई हैं, लेकिन उसके पास अभी भी जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता मौजूद है।
ट्रंप के अनुसार, ईरान के पास अब भी कुछ मिसाइलें और ड्रोन हैं, जिनका इस्तेमाल वह जरूरत पड़ने पर कर सकता है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की मिसाइल क्षमता पहले की तुलना में काफी कम हुई है, लेकिन इसे पूरी तरह समाप्त नहीं माना जा सकता।
उधर, अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि संघर्षविराम लागू होने के बाद यह सबसे महत्वपूर्ण सैन्य घटनाओं में से एक माना जा रहा है। ऐसे समय में यह कार्रवाई हुई है जब क्षेत्र में लागू नाजुक युद्धविराम पहले से दबाव में है।
वहीं ईरान के सरकारी प्रसारक IRIB ने दक्षिणी ईरान के सिरिक क्षेत्र में तड़के कई धमाकों की आवाज सुनाई देने की जानकारी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, सुबह करीब 2:30 बजे हुए इन धमाकों की वजह को लेकर अभी तक किसी आधिकारिक एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है। हालांकि इन घटनाओं ने क्षेत्र में नई सैन्य गतिविधियों की आशंकाओं को और बढ़ा दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया घटनाक्रम अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को फिर से उभार सकता है, जबकि क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी बढ़ गई हैं।
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