पीओजेके में फिर भड़की हिंसा, 4 पुलिसकर्मियों समेत 11 लोगों की मौत; इंटरनेट सेवाएं ठप

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पीओजेके में हिंसा भड़की, 4 पुलिसकर्मियों समेत 11 की मौत; इंटरनेट सेवाएं बंद

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में एक बार फिर हिंसा भड़क उठी है। आर्थिक और राजनीतिक मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों तथा सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में चार पुलिसकर्मियों और सात नागरिकों समेत कुल 11 लोगों की मौत हो गई, जबकि 70 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। हालात को देखते हुए प्रशासन ने कई इलाकों में मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी हैं।

तनावपूर्ण स्थिति के बीच सिविल सोसाइटी समूहों के गठबंधन ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने मंगलवार को बड़े आंदोलन का आह्वान किया है। क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई है।

रिपोर्टों के मुताबिक विवाद की शुरुआत शुक्रवार को हुई, जब एक व्यापारी और पुलिसकर्मियों के बीच कथित विवाद के बाद व्यापारी की गोली लगने से मौत हो गई। उसका शव रावलकोट स्थित कंबाइंड मिलिट्री हॉस्पिटल लाया गया, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोग वहां जुट गए और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया।

स्थिति तब बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें शुरू हो गईं। पुंछ डिवीजन के कमिश्नर सरदार वहीद खान के अनुसार, हिंसा के दौरान चार पुलिसकर्मी और एक राहगीर मारे गए। अधिकारियों का कहना है कि इसके बाद हुई कार्रवाई में छह प्रदर्शनकारियों की भी मौत हुई।

पुलिस प्रमुख लियाकत मलिक के मुताबिक, घटना में 23 सुरक्षाकर्मी और करीब 50 प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। साथ ही 100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है।

दूसरी ओर, JAAC नेतृत्व ने सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन के प्रमुख शौकत नवाज मीर ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि संगठन अपने घोषित विरोध कार्यक्रम और बंद के आह्वान पर कायम है।

राजनीतिक कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्जा ने भी क्षेत्र की स्थिति पर चिंता जताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि क्षेत्र में राजनीतिक और मानवीय संकट गहराता जा रहा है।

हालांकि प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों के आरोपों को खारिज किया है। अधिकारियों का दावा है कि भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश के दौरान कुछ लोगों ने स्वचालित हथियारों, पेट्रोल बमों और अन्य साधनों से हमला किया, जिसके बाद स्थिति और बिगड़ गई।

JAAC की प्रमुख मांगों में 2027 के प्रस्तावित क्षेत्रीय विधानसभा चुनावों में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों की व्यवस्था समाप्त करना शामिल है। संगठन का आरोप है कि इन सीटों पर ऐसे उम्मीदवार चुनाव लड़ते हैं, जो क्षेत्र के स्थायी निवासी नहीं हैं।

इस बीच क्षेत्रीय सरकार ने हाल ही में आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत JAAC को प्रतिबंधित संगठन घोषित किया है। प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पर्यटकों को भी संवेदनशील इलाकों से दूर रहने की सलाह दी है।

विश्लेषकों का मानना है कि पीओजेके में बढ़ता असंतोष पाकिस्तान के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के लिए नई चुनौती बन सकता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग तो किया जा रहा है, लेकिन विकास और बुनियादी सुविधाओं के मामले में उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा।

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