दिल्ली में प्रदर्शनों से परेशान व्यापारी, भैया दूज तक राहत नहीं मिली तो दुकानों की चाबियां सौंपने की चेतावनी
दिल्ली में प्रदर्शनों से कारोबार को भारी नुकसान, व्यापारियों की चेतावनी- भैया दूज तक नहीं रुके रैली तो सौंप देंगे दुकानों की चाबियां
दिल्ली में पिछले कई महीनों से जारी धरना-प्रदर्शनों और रैलियों का असर अब कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है। लगातार लगने वाले जाम और बाजारों में आवाजाही प्रभावित होने से व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इससे नाराज दिल्ली के व्यापारिक संगठनों ने अब विरोध तेज करने की चेतावनी दी है।
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने साफ कहा है कि यदि 11 नवंबर यानी भैया दूज तक रैलियों और प्रदर्शनों पर रोक नहीं लगाई गई, तो व्यापारी अपनी दुकानों की चाबियां प्रदर्शन आयोजित करने वालों को सौंप देंगे। संगठन ने सुझाव दिया है कि बड़े आयोजनों के लिए बुराड़ी, अलीपुर और यमुना खादर जैसे वैकल्पिक स्थानों का इस्तेमाल किया जाए, ताकि राजधानी के प्रमुख कारोबारी इलाकों में सामान्य गतिविधियां प्रभावित न हों।
प्रमुख बाजारों में रैली और मार्च पर रोक लगाने की मांग
CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर त्योहारों के दौरान राजधानी के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में रैलियों और विरोध मार्च की अनुमति नहीं देने की मांग की है। इनमें कनॉट प्लेस, जंतर-मंतर, रामलीला मैदान, इंडिया गेट, राजघाट के अलावा मध्य दिल्ली और पुरानी दिल्ली के इलाके शामिल हैं।
संगठन का दावा है कि 1 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच धरना-प्रदर्शनों और रैलियों के कारण दिल्ली के कारोबार को करीब 14 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। व्यापारियों का कहना है कि त्योहारों के समय बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही सबसे ज्यादा होती है, लेकिन लगातार यातायात बाधित रहने से बिक्री पर सीधा असर पड़ रहा है।
एक दिन की रैली से 11 हजार करोड़ के कारोबार पर असर
बृजेश गोयल के मुताबिक, 1 से 30 अक्टूबर के बीच जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस के आसपास रोजाना लगने वाले जाम के कारण करीब 3 हजार करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ। वहीं, 1 नवंबर को रामलीला मैदान में आयोजित महारैली के दौरान अकेले एक दिन में लगभग 11 हजार करोड़ रुपये का व्यापार प्रभावित होने का दावा किया गया है।
CTI के अनुसार, इस रैली के चलते चांदनी चौक, सदर बाजार, करोल बाग और कनॉट प्लेस समेत कई प्रमुख कारोबारी क्षेत्रों की करीब 2.5 लाख दुकानें बंद रहीं। इससे लगभग 8,800 करोड़ रुपये का खुदरा और थोक कारोबार ठप हो गया।
इसके अलावा परिवहन क्षेत्र को करीब 1,500 करोड़ रुपये, होटल और सेवा क्षेत्र को 500 करोड़ रुपये तथा दिहाड़ी मजदूरों को लगभग 200 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान जताया गया है।
त्योहारों के सीजन में कारोबारियों की बढ़ी चिंता
व्यापारियों की परेशानी इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि 6 से 11 नवंबर तक धनतेरस, दीपावली और भैया दूज जैसे प्रमुख त्योहार हैं। यह अवधि दिल्ली के बाजारों के लिए साल के सबसे महत्वपूर्ण कारोबारी समय में गिनी जाती है।
CTI का कहना है कि यदि इस दौरान भी प्रदर्शन और रैलियों के कारण बाजारों में यातायात बाधित रहा, तो राजधानी के करीब 20 लाख व्यापारियों के सालभर के कारोबार और आर्थिक योजनाओं पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से संगठन ने प्रशासन से त्योहारों तक बाजारों को प्रदर्शन और यातायात प्रतिबंधों से राहत देने की मांग की है।
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