केंद्र सरकार के ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ ने राजनीतिक गलियारों में नई सहमति की तस्वीर पेश की है। इस कदम ने जहां सत्तापक्ष को मजबूती दी है, वहीं विपक्ष की कई महिला नेताओं ने भी खुलकर इसका समर्थन किया है।
देश की पूर्व राष्ट्रपति Pratibha Patil ने इस अधिनियम को “ऐतिहासिक” बताते हुए प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह संशोधन लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत करेगा और विधायी संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाएगा।
वहीं Mayawati ने भी 33% महिला आरक्षण का समर्थन किया, हालांकि उन्होंने इसमें एससी, एसटी और ओबीसी महिलाओं के लिए अलग कोटा तय करने की मांग दोहराई। उनका कहना है कि उनकी पार्टी लंबे समय से महिलाओं के लिए 50% आरक्षण की पक्षधर रही है।
संसद के विशेष सत्र में ‘नारी शक्ति वंदन’ संशोधन विधेयक के साथ परिसीमन विधेयक भी पेश किया जा रहा है। जहां परिसीमन को लेकर विपक्ष ने सरकार के खिलाफ रणनीति बनाई है, वहीं महिला आरक्षण के मुद्दे पर कई दलों के बीच मतभेद कम होते दिख रहे हैं।
पूर्व लोकसभा अध्यक्ष Meira Kumar भी इस पहल के समर्थन में नजर आईं और प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में शामिल हुईं। इसके अलावा कांग्रेस नेता Jaya Thakur ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर महिला आरक्षण को बिना देरी लागू करने की मांग की है।
कुल मिलाकर, ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ ने भारतीय राजनीति में एक ऐसा मुद्दा खड़ा किया है, जिस पर दलगत सीमाएं कुछ हद तक टूटती नजर आ रही हैं, भले ही इसके क्रियान्वयन और स्वरूप को लेकर बहस जारी हो।
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