बांग्लादेश का इतिहास बदलने में जुटी यूनुस सरकार, शेख मुजीबुर रहमान से राष्ट्रपिता की उपाधि छीनी; नोटों से भी हटेगी तस्वीर

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बांग्लादेश के संस्थापक बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान अब राष्ट्रपिता नहीं रहे। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने उनकी राष्ट्रपिता की उपाधि वापस ले ली है।

1971 के मुक्ति संग्राम की अगुआई करने वाले शेख मुजीबुर रहमान शेख मुजीब नाम से प्रसिद्ध रहे और अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के पिता थे।

अंतरिम सरकार ने देश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान के चित्र को नए करेंसी नोटों से हटाने के कुछ दिन बाद मंगलवार को यह कदम उठाया। ढाका ट्रिब्यून अखबार में बुधवार को प्रकाशित खबर के अनुसार, अंतरिम सरकार ने राष्ट्रीय स्वतंत्रता सेनानी परिषद अधिनियम में संशोधन करते हुए स्वतंत्रता सेनानी की परिषाभा में बदलाव किया है।

शेख मुजीबुर रहमान का नाम हटाया
कानून, न्याय और संसदीय मामलों के मंत्रालय ने मंगलवार रात संबंधित अध्यादेश जारी किया। संशोधित कानून में ‘राष्ट्रपिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान’ शब्द और कानून के उस हिस्से, जिसमें ‘राष्ट्रपिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान’ का नाम था, उसे हटा दिया गया है।

इसके अलावा मुक्ति संग्राम की परिभाषा में भी थोड़ा बदलाव किया गया है। मुक्ति संग्राम की नई परिभाषा में बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान का नाम हटा दिया गया है। पिछली परिभाषा में उल्लेख किया गया था कि मुक्ति संग्राम बंगबंधु के स्वतंत्रता के आह्वान के तहत छेड़ा गया था।

संशोधित कानून के अनुसार, बांग्लादेश की युद्धकालीन निर्वासित सरकार (मुजीबनगर सरकार) से जुड़े सभी एमएनए (राष्ट्रीय विधानसभा के सदस्य) और एमपीए (प्रांतीय विधानसभा के सदस्य), जो बाद में पूर्व संविधान सभा के सदस्य माने गए थे, अब मुक्ति संग्राम के सहयोगी के तौर पर जाने जाएंगे। अब तक उन्हें स्वतंत्रता सेनानी के रूप में मान्यता दी गई थी।

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