पाक आर्मी चीफ असीम मुनीर की दो महीने में दूसरी अमेरिका यात्रा, वॉशिंगटन-इस्लामाबाद रिश्तों में आ रही नजदीकी?
पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर एक बार फिर अमेरिका की यात्रा पर जा रहे हैं। यह दौरा दो महीने के भीतर उनकी दूसरी अमेरिकी यात्रा होगी। पाकिस्तानी अख़बार डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, मुनीर इस बार यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर जनरल माइकल ई. कुरिल्ला के विदाई समारोह में भाग लेने के लिए अमेरिका पहुंचेंगे। यात्रा के दौरान उनकी कई वरिष्ठ अमेरिकी सैन्य अधिकारियों से मुलाकातें भी प्रस्तावित हैं।
मुनीर की इस यात्रा को वॉशिंगटन और इस्लामाबाद के बीच रणनीतिक संवाद में तेजी और द्विपक्षीय संबंधों की गहराई के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। खास बात यह है कि यह दौरा उस समय हो रहा है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत पर आयात शुल्क बढ़ा दिए हैं, जिससे भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों में तनातनी आई है। दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान के साथ व्यापार समझौते के तहत टैरिफ में छूट और ऊर्जा सहयोग जैसे प्रस्तावों को प्राथमिकता दी है।
जून में हुई थी ट्रंप-मुनीर मुलाकात
18 जून को व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति ट्रंप और जनरल मुनीर के बीच एक अहम बैठक और साझा लंच हुआ था। यह मुलाकात इसलिए भी उल्लेखनीय थी क्योंकि इसमें किसी भी अमेरिकी नागरिक अधिकारी की मौजूदगी नहीं थी, और प्रेस को भी भीतर जाने की अनुमति नहीं दी गई थी। ट्रंप ने बाद में कहा था कि जनरल मुनीर से मिलना उनके लिए सम्मान की बात थी, और उन्होंने युद्ध टालने के प्रयासों में पाक सेना प्रमुख की भूमिका की सराहना की थी।
मुलाकात ऐसे समय पर हुई थी जब भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव था। इससे कुछ हफ्ते पहले ही जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 नागरिकों की जान गई थी, जिसके जवाब में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया था। ऐसे माहौल में पाक सेना प्रमुख की अमेरिकी राष्ट्रपति से निजी बैठक कई सवाल भी खड़े करती है।
नोबेल नॉमिनेशन और ‘शांति वार्ता’
इस बीच यह भी खबर सामने आई थी कि पाकिस्तान ने राष्ट्रपति ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया था। ट्रंप ने दावा किया था कि भारत-पाक के बीच संघर्ष विराम कराने में उनकी अहम भूमिका रही है — एक बयान जिसे पाकिस्तान ने समर्थन दिया, लेकिन भारत ने सिरे से खारिज कर दिया।
जनरल मुनीर की नवीनतम यात्रा जहां अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों की नई परतें खोलती दिख रही है, वहीं भारत के लिए यह एक कूटनीतिक संदेश भी हो सकता है कि वॉशिंगटन का रणनीतिक झुकाव फिलहाल किस दिशा में बढ़ रहा है।
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