हांगकांग की ताई पो हाई-राइज़ में भीषण आग: 44 की मौत, 279 लापता; बांस के मचानों पर उठा सवाल
हांगकांग के ताई पो जिले में बुधवार दोपहर लगी भीषण आग ने आठ ऊंची इमारतों वाले एक हाउसिंग एस्टेट को अपनी चपेट में ले लिया। 2,000 अपार्टमेंट वाले इस परिसर में लगी आग में अब तक 44 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। मरने वालों में एक 37 वर्षीय फायरफाइटर भी शामिल है, जिसका जला हुआ शव आधे घंटे तक संपर्क टूटने के बाद मिला।
हांगकांग के नेता जॉन ली के अनुसार, अभी भी 279 लोग लापता हैं, जबकि पुलिस ने घटना से जुड़े तीन लोगों को गिरफ्तार किया है — इनमें दो निर्माण कंपनी के डायरेक्टर और एक कंसल्टेंट शामिल हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मृतकों, विशेषकर ड्यूटी में जान गंवाने वाले फायरफाइटर के प्रति संवेदना व्यक्त की है।
तीन दशकों में हांगकांग की यह सबसे भयावह आग मानी जा रही है, जिसने शहर की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हर प्रभावित इमारत 32 मंजिला टावर है, जहाँ हजारों निवासी आग का शिकार हुए या फंस गए।
आखिर कैसे लगी इतनी बड़ी आग?
आग का सही कारण स्पष्ट नहीं है, पर शुरुआती जांच इसे फैलने के लिए बांस के मचानों को जिम्मेदार मान रही है। ताई पो के कई टावरों में मेंटेनेंस का काम जारी था और इमारतों पर पारंपरिक बांस के स्कैफोल्डिंग लगे हुए थे, जिन पर लगी प्लास्टिक शीट, कैनवास कवर और प्रोटेक्टिव नेट आग की लपटों के साथ तेजी से भड़क उठे।
हांगकांग में सुरक्षा कारणों से बांस के स्कैफोल्डिंग को मार्च से चरणबद्ध तरीके से हटाया जा रहा है, लेकिन कई निर्माण स्थलों पर अभी भी इनका उपयोग जारी है। मेनलैंड चीन में भी अब बांस की जगह बड़े पैमाने पर मेटल स्कैफोल्डिंग का उपयोग किया जाता है।
65 वर्षीय स्थानीय निवासी यूएन के अनुसार, मेंटेनेंस चलने के कारण कई लोगों ने अपनी खिड़कियाँ बंद रखीं, जिसके चलते कई निवासियों को फायर अलार्म की आवाज़ तक नहीं सुनाई दी।
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