भारत ने फरवरी 2026 में ईरान से जुड़े और अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित तीन तेल टैंकरों को मुंबई के पास जब्त कर लिया है।
साथ ही, देश ने अपने समुद्री क्षेत्रों में अवैध तेल व्यापार को रोकने के लिए निगरानी बढ़ा दी है। यह जानकारी न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने एक विश्वसनीय सूत्र के हवाले से दी है। अधिकारियों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय जलमार्गों का इस्तेमाल शिप-टू-शिप (Ship-to-Ship) ट्रांसफर जैसी गतिविधियों के लिए न हो, जिससे तेल कार्गो के स्रोत को छिपाया जा सके।
जहाजों की जब्ती और निगरानी
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अधिकारियों ने 6 फरवरी को मुंबई से लगभग 100 समुद्री मील पश्चिम में तीन जहाजों को रोका। बाद में उन्हें आगे की जांच के लिए मुंबई लाया गया। इसके बाद भारतीय तटरक्षक बल ने अपने समुद्री क्षेत्रों में चौबीसों घंटे निगरानी के लिए करीब 55 जहाज और 10–12 विमान तैनात किए।
अमेरिका के साथ संबंध और व्यापार समझौता
इस कदम के समय अमेरिका और भारत के बीच संबंधों में सुधार आया है। फरवरी की शुरुआत में दोनों देशों ने व्यापार समझौते पर मुहर लगाई, जिसके तहत अमेरिका में भारतीय सामानों पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया जाएगा। अमेरिका का कहना है कि भारत ने रूस से तेल आयात बंद करने पर सहमति जताई है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार सूत्र ने बताया कि जिन तीन प्रतिबंधित जहाजों को सीज किया गया है, वे स्टेलर रूबी, एस्फाल्ट स्टार और अल जाफ़ज़िया हैं. ये तीनों जहाज जिस देश के तट से होकर गुजरते थे, वहां की कानून लागू करने वाली एजेंसियों से बचने के लिए अक्सर अपनी पहचान बदलते थे. उनके मालिक विदेशों में स्थित थे.
क्या जहाज ईरानी हैं?
रॉयटर्स के अनुसार, पिछले साल यूएस ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल ने ग्लोबल पीस, चिल 1 और ग्लोरी स्टार 1 नाम के तीन जहाजों पर प्रतिबंध लगाया था। इन जहाजों के IMO नंबर भारत द्वारा जब्त किए गए जहाजों से मेल खाते हैं। आंकड़ों के अनुसार, इनमें से दो जहाज ईरान से जुड़े हैं:
अल जाफ़ज़िया – 2025 में ईरान से जिबूती तक फ्यूल ऑयल ढोया।
स्टेलर रूबी – ईरानी झंडे के तहत रजिस्टर्ड।
तीसरा जहाज एस्फाल्ट स्टार मुख्य रूप से चीन के आसपास के समुद्री मार्गों पर संचालित होता रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रतिबंधित तेल और फ्यूल अक्सर उच्च जोखिम और भारी छूट के साथ बेचे जाते हैं।
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