ईरान में जारी युद्ध के कारण लोग देश छोड़ने या वहीं रहने के फैसले को लेकर दुविधा में हैं। कई लोग सुरक्षा की तलाश में देश से बाहर जा रहे हैं, तो कुछ अपने परिवार और घरों की रक्षा के लिए विदेश से वापस लौट रहे हैं।
पूर्वी ईरानी शहर गोलेस्तान में अपने घर के पास हुए बम विस्फोट के बाद मर्वे पौरकाज ने सुरक्षा की तलाश में करीब 1500 किलोमीटर का सफर तय कर पड़ोसी देश Türkiye के वान शहर का रुख किया। उन्होंने कहा कि अगर अनुमति मिली तो वे युद्ध खत्म होने तक वहीं रहना चाहेंगी।
32 लाख लोग हुए विस्थापित
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी United Nations High Commissioner for Refugees के अनुसार Iran में जारी संघर्ष के कारण अब तक करीब 32 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं। इनमें से कुछ लोग देश के अपेक्षाकृत सुरक्षित इलाकों में जा रहे हैं, जबकि कई पड़ोसी देशों में शरण ले रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर कुछ ईरानी ऐसे भी हैं जो विदेशों में रहने के बावजूद युद्ध के दौरान अपने परिवारों और संपत्ति की सुरक्षा के लिए वापस देश लौट रहे हैं।
देश छोड़ने वालों की संख्या अभी कम
रिपोर्टों के मुताबिक अब तक अपेक्षाकृत कम लोगों ने स्थायी रूप से ईरान छोड़ने का फैसला किया है। कुछ मामलों में तो देश छोड़कर जाने वालों की तुलना में वापस लौटने वालों की संख्या ज्यादा बताई जा रही है।
हालांकि ईरान के पड़ोसी देश और यूरोप इस संभावना को लेकर चिंतित हैं कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है तो बड़े पैमाने पर पलायन हो सकता है, जिससे प्रवासन संकट पैदा हो सकता है।
कुछ लोग लौट रहे अपने घर
जहां मर्वे पौरकाज जैसे लोग सुरक्षा के लिए देश से बाहर जा रहे हैं, वहीं कई लोग अपने घर लौटने का फैसला भी कर रहे हैं।
45 वर्षीय लैला राबेत्नेजादफर्ड दक्षिणी ईरान के शहर Shiraz स्थित अपने घर लौट गईं। वे Istanbul में एक जर्मन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर से शादी करने की तैयारी कर रही थीं, लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद उन्होंने शादी समारोह स्थगित कर दिया और अपने परिवार के पास लौटने का निर्णय लिया।
लैला ने कहा, “जब मेरा परिवार युद्ध के बीच ईरान में है तो मैं इस्तांबुल में सुरक्षित कैसे महसूस कर सकती हूं? मैं युद्ध खत्म होने तक अपने देश नहीं छोड़ूंगी।”
इस बीच संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि यदि लड़ाई लंबी चली तो और भी अधिक ईरानियों को अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
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