मिडिल ईस्ट में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। Donald Trump ईरान पर दबाव बनाकर संघर्ष रोकने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन Iran फिलहाल किसी भी तरह के सीजफायर के लिए तैयार नहीं दिख रहा।
इसी बीच ट्रंप ने ईरान को मंगलवार तक का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि तय समय सीमा तक समझौता नहीं हुआ तो कड़ी सैन्य कार्रवाई की जाएगी।
ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि यदि ईरान शांति समझौते पर सहमत नहीं होता है, तो उसके अहम बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है। उनके इस बयान को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है और विशेषज्ञ इसे संभावित रूप से युद्ध अपराध (वॉर क्राइम) के दायरे में देख रहे हैं, क्योंकि नागरिक सुविधाओं पर हमला अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन माना जाता है।
वहीं, Iran ने भी सख्त रुख अपनाते हुए पलटवार की चेतावनी दी है। ईरान का कहना है कि अगर उस पर हमला किया गया, तो वह Israel और खाड़ी क्षेत्र के देशों के महत्वपूर्ण ढांचे को निशाना बना सकता है। इससे पूरे क्षेत्र में बड़े सैन्य टकराव का खतरा और बढ़ गया है।
ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया को दिए इंटरव्यू में यह भी कहा कि आने वाले 48 घंटे बेहद अहम हैं और इस दौरान समझौते की संभावना बनी हुई है। हालांकि उन्होंने यह भी दोहराया कि अगर बातचीत विफल रहती है, तो अमेरिका कठोर कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच परोक्ष बातचीत की कोशिशें भी हुई हैं, जिनमें Pakistan, Egypt और Turkey जैसे देशों ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। बातचीत का मकसद Strait of Hormuz को खुला रखने और संघर्ष विराम की दिशा में आगे बढ़ना था, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है।
मौजूदा हालात को देखते हुए क्षेत्र में तनाव कम होने के बजाय और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जिससे सीजफायर की संभावना फिलहाल कम नजर आ रही है।
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