मां से अपने नाम कराई सारी संपत्ति, फिर घर से निकाला; सुप्रीम कोर्ट ने बेटे को लगाई कड़ी फटकार

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मां की संपत्ति अपने नाम कराने के बाद घर से निकाला, सुप्रीम कोर्ट ने बेटे को लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक ऐसे मामले की सुनवाई के दौरान बेटे के व्यवहार पर कड़ी नाराजगी जताई, जिसमें आरोप है कि उसने अपनी मां की संपत्ति अपने नाम कराने के बाद उन्हें घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि बेटे ने अपनी मां की देखभाल नहीं की तो संपत्ति से जुड़ी गिफ्ट डीड रद्द की जा सकती है।

जस्टिस मनमोहन और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें बेटे ने तेलंगाना हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने पहले गिफ्ट डीड को निरस्त करते हुए संपत्ति वापस मां के नाम करने का आदेश दिया था।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपील में प्रथम दृष्टया कोई खास दम नजर नहीं आता। अदालत ने यह भी नोट किया कि बेटे ने कथित तौर पर अपनी मां की अनुमति के बिना उनके संयुक्त बैंक खाते से करीब 1.6 करोड़ रुपये निकाल लिए थे।

पीठ ने दोनों पक्षों को आपसी रिश्तों में सुधार का अवसर देते हुए मामले को मध्यस्थता (मीडिएशन) के जरिए सुलझाने का सुझाव दिया। हालांकि अदालत ने बेटे के रवैये पर गंभीर सवाल भी उठाए।

कोर्ट ने टिप्पणी की, “अपने आचरण पर गौर कीजिए। संपत्ति हासिल करने के बाद आपने अपनी मां को घर छोड़ने के लिए मजबूर किया और अब उन्हें वापस साथ रखने की भी इच्छा नहीं दिखा रहे हैं। हाई कोर्ट के निष्कर्ष काफी स्पष्ट हैं।”

इससे पहले तेलंगाना हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि यह स्वीकार करना कठिन है कि कोई बेटा मामूली कारणों से अपनी बुजुर्ग मां से संबंध तोड़ने को उचित ठहरा सकता है। अदालत ने कहा था कि संपत्ति और धन के हस्तांतरण के तुरंत बाद रिश्तों में आई दरार पूरे मामले के पीछे की मंशा पर सवाल खड़े करती है।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अंतिम फैसला नहीं दिया है और पक्षों को रिश्तों में सुधार की दिशा में प्रयास करने का अवसर प्रदान किया है।

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