ड्रोन हमले के बाद सऊदी ने बंद की तेल पाइपलाइन, ईरान पर ट्रंप का शक; इराक से जुड़े हमले के तार
सऊदी अरब ने अपनी तेल पाइपलाइन पर हुए ड्रोन हमले के बाद पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। हमले की अभी तक किसी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसके पीछे ईरान का हाथ होने की आशंका जताई है।
हालांकि, सऊदी अरब और इराक दोनों का कहना है कि हमले इराक की जमीन से किए गए, जहां ईरान समर्थित मिलिशिया सक्रिय हैं। इराक के प्रधानमंत्री और सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ अली अल-जैदी ने शनिवार को मैसान ऑपरेशंस कमांडर को पद से हटा दिया। बताया जा रहा है कि ड्रोन हमले मैसान प्रांत से किए गए थे।
इराक ने ड्रोन के लॉन्चिंग पैड का पता लगाने के लिए संयुक्त जांच कराने के ईरान के प्रस्ताव को भी स्वीकार कर लिया है। सऊदी अरब ने इराकी प्रधानमंत्री के अनुरोध के बाद फिलहाल किसी तरह की जवाबी कार्रवाई नहीं की है।
लाल सागर में हूती की बढ़ती सक्रियता
इस बीच, यमन के लाल सागर तट पर हूती विद्रोहियों की गतिविधियां बढ़ रही हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, यह अभियान ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के निर्देश पर आगे बढ़ाया जा रहा है।
दो ईरानी सूत्रों के अनुसार, ईरान ने पिछले सप्ताह हूती समूह से सऊदी अरब पर हमले तेज करने को कहा था। इसके लिए अतिरिक्त धन, हथियार और अधिकारियों की मदद का भी आश्वासन दिया गया था।
हालांकि, हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने कहा कि पहले से घोषित प्रतिबंधों के दायरे में आने वाले सऊदी जहाजों को छोड़कर अन्य जहाजों के लिए लाल सागर में समुद्री आवाजाही सुरक्षित है।
सऊदी की मदद पर अमेरिका ने बनाई दूरी
हूती हमलों के बीच अमेरिका इस दुविधा में है कि सऊदी अरब को सैन्य मदद दी जाए या नहीं। सीधे हस्तक्षेप से क्षेत्रीय संघर्ष के और फैलने का खतरा पैदा हो सकता है।
तीन सूत्रों के मुताबिक, सऊदी अरब के वास्तविक शासक और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने गुरुवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात कर हूती के खिलाफ सैन्य सहायता मांगी थी।
हालांकि, वाशिंगटन ने फिलहाल सीधे सैन्य हस्तक्षेप से इनकार किया है। अमेरिका सऊदी अरब को खुफिया जानकारी जुटाने में मदद करने को तैयार है। ट्रंप ने शनिवार को क्राउन प्रिंस के साथ बातचीत की पुष्टि भी की।
ट्रंप के मुताबिक, हूती की ओर से भी उनके प्रशासन से संपर्क किया गया था और अमेरिका से इस संघर्ष में सीधे शामिल नहीं होने का अनुरोध किया गया था।
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