ब्रिक्स घोषणापत्र में पश्चिम को सख्त संदेश, टैरिफ-ट्रेड समेत कई मुद्दों पर बनी सहमति; भारत की कूटनीति सफल
मतभेदों के बीच भारत ने हासिल की बड़ी कूटनीतिक कामयाबी, ब्रिक्स में ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ पर बनी सहमति
कई अहम मुद्दों पर मतभेद के बावजूद भारत ने शनिवार को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले सत्र के बाद ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ जारी कराने में बड़ी कूटनीतिक सफलता हासिल की। दो दिवसीय सम्मेलन में सदस्य देशों ने 45 पन्नों के दस्तावेज के 140 बिंदुओं पर सहमति जताई।
घोषणापत्र में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की स्पष्ट निंदा की गई। साथ ही आतंकवाद के सुरक्षित ठिकानों को खत्म करने और सीमा पार आतंकवाद तथा आतंकियों की आवाजाही के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई का संकल्प लिया गया।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर भी ब्रिक्स देशों ने संयम और संवाद का रास्ता अपनाने पर जोर दिया। घोषणापत्र में युद्धों को रोकने, परमाणु जोखिम कम करने और अंतरराष्ट्रीय विवादों का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील की गई।
टैरिफ और व्यापार प्रतिबंधों पर पश्चिम को संदेश
घोषणापत्र में एकतरफा टैरिफ और व्यापार प्रतिबंधों को लेकर भी पश्चिमी देशों को स्पष्ट संदेश दिया गया। ब्रिक्स देशों ने वैश्विक व्यापार व्यवस्था में एकतरफा कदमों के नकारात्मक प्रभावों पर चिंता जताई और नियम आधारित बहुपक्षीय व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को शिखर सम्मेलन के पहले सत्र के समापन के बाद घोषणापत्र पर सहमति बनने की जानकारी दी।
इस सहमति के साथ उन अटकलों पर भी विराम लग गया कि पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर सदस्य देशों के बीच मतभेद साझा घोषणापत्र जारी करने में बाधा बन सकते हैं।
ईरान मुद्दे पर बनी थी सबसे बड़ी अड़चन
ईरान पर हुए हमलों के संदर्भ में अमेरिका का सीधे उल्लेख किए जाने को लेकर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच मतभेद सामने आए थे। ब्रिक्स में फैसले आम सहमति से लिए जाते हैं, ऐसे में किसी एक सदस्य देश की असहमति भी संयुक्त घोषणा को रोक सकती थी।
आधी रात तक चली मैराथन बातचीत
45 पन्नों के घोषणापत्र पर सहमति बनाने के लिए भारतीय अधिकारियों को देर रात तक गहन कूटनीतिक बातचीत करनी पड़ी। सूत्रों के मुताबिक, 11 सितंबर की देर शाम तक दस्तावेज के करीब 90 फीसदी हिस्से पर सहमति बन चुकी थी।
हालांकि, पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर घोषणापत्र में इस्तेमाल की जाने वाली भाषा सबसे बड़ी चुनौती बनी रही। इस मुद्दे पर मतभेद दूर करने के लिए भारतीय अधिकारियों ने शनिवार तड़के करीब 2:45 बजे तक बातचीत जारी रखी। आखिरकार सदस्य देशों के बीच सहमति बनने के बाद नई दिल्ली घोषणापत्र को मंजूरी मिल गई।
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