यूपी के 4 सरकारी अस्पतालों का होगा निजीकरण, स्थानीय स्तर पर मरीजों को मिलेंगी सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं
यूपी के चार सरकारी अस्पताल 30 साल के लिए निजी हाथों में जाएंगे, मरीजों को मिलेंगी सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं
उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए चार बड़े सरकारी अस्पतालों को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर संचालित करने का फैसला किया है। इन अस्पतालों का संचालन 30 साल तक निजी कंपनियों के हाथों में रहेगा। सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था से मरीजों को अपने जिले और आसपास के क्षेत्रों में ही विशेषज्ञ और सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
इस व्यवस्था के तहत मरीजों को 12 विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के साथ कम से कम तीन अति-विशेषज्ञ सेवाएं भी मिलेंगी। इससे गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बड़े शहरों और दूसरे जिलों का रुख करने की जरूरत कम हो सकती है। हालांकि, ओपीडी, जांच और अन्य चिकित्सा सुविधाओं के लिए मरीजों को किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) द्वारा निर्धारित दरों के अनुसार भुगतान करना होगा।
कैबिनेट ने चार अस्पतालों को दी मंजूरी
27 अक्टूबर को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में चार अस्पतालों को PPP मॉडल पर चलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इनमें शामिल हैं:
- अंबेडकरनगर के टांडा स्थित 200 बेड का मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (MCH) विंग।
- बांदा का 200 बेड वाला मंडलीय चिकित्सालय।
- बरेली का 300 बेड वाला संयुक्त चिकित्सालय।
- चित्रकूट के कर्वी स्थित 200 बेड का मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विंग।
इन अस्पतालों में चिकित्सा सेवाओं के विस्तार और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की योजना है।
12 विशेषज्ञ और तीन सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं
योजना के तहत चारों अस्पतालों में जनरल मेडिसिन, जनरल सर्जरी, स्त्री एवं प्रसूति रोग, हड्डी रोग, बाल रोग, नेत्र रोग, ईएनटी, त्वचा रोग, दंत चिकित्सा, मनोरोग, आपातकालीन एवं ट्रामा और क्रिटिकल केयर व एनेस्थीसियोलॉजी की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
इसके अलावा हृदय रोग, न्यूरोलॉजी और यूरोलॉजी या नेफ्रोलॉजी में से कम से कम तीन सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं भी शुरू होंगी।
मरीजों को ओपीडी, अस्पताल में भर्ती होकर उपचार कराने, ऑपरेशन, पैथोलॉजी, एक्स-रे और अन्य इमेजिंग जांच की सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही अस्पतालों में 24 घंटे आपातकालीन और ट्रामा सेवाएं भी संचालित की जाएंगी।
आयुष्मान कार्ड धारकों को मिलेगा कैशलेस इलाज
इस योजना में आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के पात्र लाभार्थियों को भी शामिल किया गया है। उन्हें योजना के निर्धारित प्रावधानों के तहत पांच लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार मिल सकेगा।
दवाओं की उपलब्धता बेहतर बनाने के लिए अस्पताल परिसरों में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र और अमृत फार्मेसी भी संचालित की जाएंगी। इसके अलावा ब्रांडेड जेनेरिक दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) पर कम से कम 25 प्रतिशत की छूट देने का प्रावधान रखा गया है।
30 साल बाद सरकार को वापस मिलेंगे अस्पताल
चारों अस्पतालों का संचालन 30 साल की रियायत अवधि के लिए ईएफओएमटी (Equip, Finance, Operate, Maintain and Transfer) मॉडल के तहत किया जाएगा। इसके अंतर्गत निजी भागीदार को अस्पतालों के लिए जरूरी उपकरण उपलब्ध कराने, वित्तीय व्यवस्था करने, संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी निभानी होगी।
30 साल की अवधि पूरी होने के बाद निजी कंपनी अस्पतालों को पूरी तरह संचालित स्थिति में राज्य सरकार को वापस सौंप देगी। सरकार को उम्मीद है कि इस व्यवस्था से अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार होगा और आसपास के जिलों के मरीजों को बेहतर इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।
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