कन्हैयालाल हत्याकांड: राजस्थान हाईकोर्ट ने 8 आरोपियों की याचिका ठुकराई, UAPA के तहत ही चलेगा मुकदमा

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कन्हैयालाल हत्याकांड: आठों आरोपितों पर UAPA के तहत चलेगा मुकदमा, हाईकोर्ट ने याचिकाएं खारिज कीं

उदयपुर के चर्चित कन्हैयालाल हत्याकांड में राजस्थान हाईकोर्ट ने आठ आरोपितों को राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने उनकी याचिकाएं खारिज करते हुए निचली अदालत की ओर से आरोप तय किए जाने के आदेश में हस्तक्षेप नहीं किया। इसके साथ ही आरोपितों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की आतंकवाद संबंधी धाराओं के तहत मुकदमा जारी रहेगा।

मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और न्यायमूर्ति समीर जैन की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि आरोप तय करने के चरण में अदालत को पूरे मामले का मिनी ट्रायल नहीं करना होता। इस स्तर पर केवल यह देखना जरूरी है कि अभियोजन की ओर से पेश सामग्री के आधार पर आरोपितों के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं। यदि उपलब्ध साक्ष्यों से गंभीर संदेह पैदा होता है, तो आरोप तय किए जा सकते हैं।

मामले की पृष्ठभूमि सोशल मीडिया पर नूपुर शर्मा की टिप्पणी साझा किए जाने के बाद उपजे विवाद से जुड़ी है। अभियोजन के अनुसार, इसी विवाद के बाद मोहम्मद गौस और मोहम्मद रियाज ने कन्हैयालाल की दुकान में घुसकर धारदार हथियार से उनकी हत्या कर दी थी।

हाईकोर्ट ने कहा कि मामले से जुड़े वीडियो, कथित धमकियों और आरोपितों के आपसी संबंधों जैसे पहलुओं का विस्तृत परीक्षण मुकदमे की सुनवाई के दौरान किया जाएगा। आरोप तय करने के मौजूदा चरण में इन साक्ष्यों की अंतिम सत्यता पर फैसला देना उचित नहीं होगा।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने आरोपितों के खिलाफ UAPA, आर्म्स एक्ट और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए थे।

वहीं, आरोपितों की ओर से पेश अधिवक्ता मोहम्मद सलीम और सैयद सआदत अली ने दलील दी थी कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है, जिससे आरोपितों का किसी आतंकवादी संगठन से जुड़ा होना साबित हो। हाईकोर्ट ने आरोप तय करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं को स्वीकार नहीं किया।

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