“रूसी सेना में जबरन भर्ती का आरोप, गुजराती युवक ने यूक्रेन से जारी किया वीडियो”

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गुजरात के एक युवक का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

रूस–यूक्रेन युद्ध के बीच सामने आए इस वीडियो में युवक लोगों से किसी भी परिस्थिति में रूसी सेना में शामिल न होने की अपील करता नजर आ रहा है। युवक ने आरोप लगाया है कि उसे कथित तौर पर झूठे ड्रग्स मामले में फंसाकर रूसी सेना में सेवा देने के लिए मजबूर किया गया।

इस युवक की पहचान गुजरात के मोरबी निवासी साहिल मोहम्मद हुसैन के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि साहिल ने यह वीडियो यूक्रेनी सेना द्वारा पकड़े जाने के बाद बनाया है। यूक्रेनी अधिकारियों द्वारा साझा किए गए वीडियो में साहिल भारत सरकार से सुरक्षित घर वापसी में मदद की गुहार लगाते हुए दिखाई देता है।

साहिल ने बताया कि वह पढ़ाई के लिए रूस गया था और वहां एक कूरियर कंपनी में पार्ट-टाइम काम कर रहा था। इसी दौरान रूसी पुलिस ने उसे कथित रूप से झूठे ड्रग्स मामले में फंसा दिया। साहिल का दावा है कि अधिकारियों ने मामले को वापस लेने के बदले रूसी सेना में सेवा करने की शर्त रखी, जिसे मजबूरी में उसने स्वीकार कर लिया।

एक अन्य वीडियो में साहिल ने कहा कि 15 दिनों के प्रशिक्षण के बाद उसे सीधे युद्ध मोर्चे पर भेज दिया गया। मोर्चे पर पहुंचते ही उसने यूक्रेनी सेना के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। यूक्रेनी सेना ने ये वीडियो गुजरात में उसकी मां को भेजे और उनसे रूसी सेना में भर्ती से जुड़े कथित धोखे के बारे में जागरूकता फैलाने का अनुरोध किया। साहिल की मां ने अपने बेटे की सुरक्षित वापसी के लिए दिल्ली की एक अदालत में याचिका दायर की है, जिसकी अगली सुनवाई फरवरी में होने की संभावना है।

साहिल के मुताबिक वह 2024 में पढ़ाई के लिए रूस गया था, लेकिन आर्थिक और वीज़ा से जुड़ी समस्याओं के चलते वह कुछ ऐसे लोगों के संपर्क में आ गया जो कथित तौर पर नशीले पदार्थों के धंधे से जुड़े थे। उसने कहा कि उसने कोई गलत काम नहीं किया, लेकिन फिर भी उसे फंसाया गया। साहिल का दावा है कि रूस में सैकड़ों लोगों को ड्रग्स मामलों में जेल भेजा गया है और कई मामलों में सेना में भर्ती होकर आरोप हटवाने का विकल्प दिया जाता है।

वीडियो में साहिल ने कहा, “मैं बहुत निराश हूं। मुझे नहीं पता आगे क्या होगा, लेकिन रूस आने वाले युवाओं से मेरी अपील है कि सतर्क रहें। यहां कई लोग झूठे नशीले पदार्थों के मामलों में फंसाते हैं।” उसने भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मदद की अपील की है।

इस मामले पर विदेश मंत्रालय ने भी प्रतिक्रिया दी है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने 5 दिसंबर को कहा कि भारत रूसी सशस्त्र बलों में शामिल हुए अपने नागरिकों की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है। उन्होंने आगे भर्ती से बचने के लिए सतर्कता बरतने की सलाह भी दी।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान आयोजित विशेष ब्रीफिंग में मिसरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह मुद्दा राष्ट्रपति पुतिन के समक्ष उठाया है और भारतीय नागरिकों की शीघ्र रिहाई सुनिश्चित करने के लिए दोनों देशों के बीच समन्वित प्रयास लगातार जारी हैं।

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