इजरायल में सरकार गठन को लेकर सियासी उठापटक तेज, नेतन्याहू को घेरने के लिए विपक्ष की नई रणनीति; सीधे PM चुनाव का प्रस्ताव संभव
इजरायल में आम चुनाव के बाद किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने से नई सरकार के गठन पर असमंजस बना हुआ है। इस बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के विरोधी दल सरकार बनाने के लिए एकजुट होने की कोशिश कर रहे हैं। गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाले मध्यमार्गी गठबंधन और अरब पार्टियों के बीच सरकार गठन को लेकर बातचीत जारी है। वहीं, विपक्षी खेमे में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के नेता और उनके करीबी आमिर ओहाना को संसद (नीसेट) के स्पीकर पद से हटाने पर सहमति बन गई है।
सीधे प्रधानमंत्री चुनने के प्रस्ताव पर चर्चा तेज
इजरायल में पिछले एक दशक से चुनाव के बाद बहुमत नहीं मिलने और सरकार गठन में आने वाली अड़चनों के समाधान के लिए अब प्रधानमंत्री के सीधे चुनाव का विकल्प भी चर्चा में है। खास बात यह है कि 2021 में भी जब किसी दल या गठबंधन को बहुमत नहीं मिला था, तब नेतन्याहू ने इसी तरह का प्रस्ताव रखा था।
एएनआई के मुताबिक, इस बार यह मुद्दा नेतन्याहू विरोधी विपक्षी खेमे में उठा है। यदि सरकार गठन को लेकर सहमति नहीं बनती है तो शुक्रवार को गठित होने वाली नई संसद के पहले सत्र में इस संबंध में प्रस्ताव पेश किया जा सकता है।
इस प्रस्ताव को सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों खेमों का समर्थन मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, अरब पार्टियां इसे लेकर अभी असमंजस में हैं और उन्हें भी समर्थन के लिए तैयार करने की कोशिश की जा रही है।
अमेरिका की तरह हो सकता है प्रधानमंत्री का सीधा चुनाव
प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि प्रधानमंत्री के सीधे चुनाव की व्यवस्था लागू होने से 120 सदस्यीय नीसेट में बहुमत जुटाने की बार-बार पैदा होने वाली समस्या का समाधान हो सकता है। इसके तहत जनता सीधे प्रधानमंत्री का चुनाव करेगी और निर्वाचित नेता अपनी पसंद के मंत्रियों के साथ सरकार चला सकेगा।
इस व्यवस्था में प्रधानमंत्री को सरकार चलाने के लिए नीसेट में अनिवार्य रूप से बहुमत साबित करने की जरूरत नहीं होगी। प्रस्तावित व्यवस्था की तुलना अमेरिका की राष्ट्रपति प्रणाली से की जा रही है, जहां मतदाता सीधे राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं।
नेतन्याहू विरोधी दलों को साथ आने की अपील
टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार देर शाम देश के कई शहरों में नेतन्याहू सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने मध्यमार्गी गठबंधन और अरब पार्टियों से एकजुट होकर नई सरकार बनाने की अपील की।
प्रदर्शनकारियों का तर्क था कि बहुमत ने नेतन्याहू सरकार के विरोध में मतदान किया है, इसलिए सभी विरोधी दलों को मिलकर सरकार बनानी चाहिए। तेल अवीव, बीरशेबा, हाइफा और तईबा में इन प्रदर्शनों का आयोजन किया गया।
विपक्ष के पास 67, नेतन्याहू गठबंधन के पास 53 सांसद
चुनाव के बाद मौजूदा संख्या के अनुसार, नेतन्याहू विरोधी मध्यमार्गी गठबंधन और अरब पार्टियों के पास कुल 67 सांसद हैं। वहीं, लिकुड पार्टी के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन के पास 53 सांसद हैं। इजरायल की 120 सदस्यीय संसद में सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है।
आमिर ओहाना को स्पीकर पद से हटाने की तैयारी
इस बीच, नेतन्याहू विरोधी दोनों गठबंधनों के बीच नई संसद के गठन के साथ ही आमिर ओहाना को स्पीकर पद से हटाने पर सहमति बन गई है। ओहाना को नेतन्याहू का करीबी माना जाता है।
विपक्षी दल बहुमत के आधार पर उन्हें पद से हटाकर नेतन्याहू को राजनीतिक झटका देना चाहते हैं। विपक्ष का मानना है कि नेतन्याहू को सत्ता से बाहर करने की रणनीति में संसद के स्पीकर पद पर बदलाव भी अहम कदम साबित हो सकता है।
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