CJI ने कहा: कुछ ट्रिब्यूनल के गैर-न्यायिक सदस्य सरकार के खिलाफ आदेश देने से हिचकिचाते हैं

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CJI गवई ने ट्रिब्यूनलों के सदस्यों की प्रभावशीलता पर चिंता जताई।

चीफ जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि न्यायाधिकरणों के कुछ गैर-न्यायिक सदस्य, जो आमतौर पर पूर्व नौकरशाह होते हैं, सरकार के खिलाफ आदेश देने से कतराते हैं। उन्होंने इन सदस्यों से प्रशिक्षण और समान मानकों के पालन पर ध्यान देने का अनुरोध किया।

CJI गवई ने यह बातें केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) के 10वें अखिल भारतीय सम्मेलन में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और पीएमओ में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में कही। उन्होंने कहा कि ट्रिब्यूनल न्यायालयों से अलग होते हैं, क्योंकि ये कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच विशेष स्थान रखते हैं।

CJI ने सदस्यों के लिए लगातार प्रशिक्षण, नियमित कार्यशालाएं और समान नियुक्ति प्रक्रिया की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने यह भी चिंता जताई कि नौकरशाह जोखिम लेने से डरते हैं और दोष अदालतों पर डालते हैं, जिससे ट्रिब्यूनलों के फैसलों के खिलाफ अपीलें बढ़ रही हैं।

राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों के मामलों में हाई कोर्टों में अनावश्यक अपीलों को रोकने के उपाय खोजे जाने चाहिए। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने भी सरकारी विभागों द्वारा ठोस अदालत आदेशों के खिलाफ अपील की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने की जरूरत बताई।

दोनों मंत्रियों ने ट्रिब्यूनलों की भूमिका की सराहना की और ई-फाइलिंग और डिजिटल सुनवाई जैसी तकनीकों के इस्तेमाल से मुकदमों का बोझ कम करने पर जोर दिया।

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