बिहार वोटर लिस्ट पुनरीक्षण पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, विपक्ष और चुनाव आयोग आमने-सामने
बिहार में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में आज (गुरुवार) सुनवाई होनी है। मुख्य न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ इस विवादित मामले की सुनवाई करेगी।
क्या है मामला?
विपक्षी दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि चुनाव आयोग की यह कवायद मनमानी है, जिससे लाखों मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हट सकते हैं। कांग्रेस समेत कई दलों का कहना है कि इस प्रक्रिया के तहत मतदाताओं से आधार या वोटर आईडी नहीं, बल्कि अन्य दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, जिससे वैध नागरिकों को भी बाहर कर दिया जा सकता है।
याचिकाओं में क्या कहा गया?
सामाजिक कार्यकर्ता अरशद अजमल और रूपेश कुमार की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि यह प्रक्रिया संविधान में निहित स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के सिद्धांत के खिलाफ है। याचिका में तर्क दिया गया है कि जन्म, निवास और नागरिकता से संबंधित कठोर दस्तावेजीकरण की शर्तें मतदाताओं को अनुचित रूप से वंचित कर सकती हैं।
चुनाव आयोग के पक्ष में क्या कहा गया?
इस मामले में वकील अश्विनी उपाध्याय ने चुनाव आयोग के फैसले का समर्थन करते हुए अलग याचिका दायर की है। उनका कहना है कि यह पुनरीक्षण ज़रूरी है ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि केवल भारतीय नागरिक ही देश की राजनीति और नीति निर्धारण में भाग लें। उन्होंने दावा किया कि देश के कई हिस्सों में अवैध घुसपैठ, धोखाधड़ी से धर्मांतरण और जनसंख्या विस्फोट के कारण जनसांख्यिकीय बदलाव हुए हैं, जिसे संतुलित करना जरूरी है।
कांग्रेस और विपक्ष की प्रतिक्रिया
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि कांग्रेस ने 9 अन्य विपक्षी दलों के साथ मिलकर चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने इसे “त्रुटिपूर्ण और विनाशकारी” बताते हुए कहा कि इससे लाखों मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं।
कांग्रेस पार्टी ने अपने आधिकारिक बयान में इसे “वोट के अधिकार को छीनने की साजिश” बताया और कहा कि यह कवायद जनता के खिलाफ है, जिसे सरकार और चुनाव आयोग ने मिलकर रचा है।
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