दिल्ली का दम घुटा: शिमला से 13 गुना ज्यादा प्रदूषित हवा, ITO से पंजाबी बाग तक हालात खराब

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दिल्ली-एनसीआर में हवा फिर ‘गंभीर’, कई शहरों में AQI 400 पार; पहाड़ों में राहत

दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत के कई शहर शनिवार सुबह खतरनाक प्रदूषण की चपेट में रहे। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मुताबिक, दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 384 दर्ज हुआ, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है।

नोएडा में हालात और खराब हैं, जहां AQI 418 तक पहुंच गया। गाजियाबाद में 379, गुरुग्राम में 361, फरीदाबाद में 402 और लखनऊ में 355 रिकॉर्ड किया गया। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में AQI 251, जबकि चंडीगढ़ में 313 रहा।

दिल्ली के प्रमुख इलाकों का AQI

नई दिल्ली: 388

ITO: 342

द्वारका: 262

पंजाबी बाग: 347

सिरीफोर्ट: 342

लोधी रोड: 302

आरके पुरम: 363

पहाड़ों में साफ हवा, मैदानों में भारी प्रदूषण

पहाड़ी राज्यों में वायु गुणवत्ता अपेक्षाकृत बेहतर बनी हुई है। नैनीताल में AQI 94, जबकि शिमला में सिर्फ 30 रिकॉर्ड किया गया, जो ‘अच्छी’ श्रेणी में माना जाता है।

सर्दियों में दिल्ली फिर बनी गैस चैंबर

दिल्ली में यह प्रदूषण हर सर्दी दोहराया जाता है। अक्टूबर से जनवरी के बीच हवा की गति कम होने, पत्तों के जलने, वाहनों के बढ़ते धुएं और औद्योगिक गतिविधियों के कारण राजधानी की हवा बेहद जहरीली हो जाती है। दिल्ली दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में लगातार शीर्ष पर बनी रहती है।

CPCB के मानदंड के अनुसार:

0–50 → अच्छा

51–100 → संतोषजनक

101–200 → मध्यम

201–300 → खराब

301–400 → बहुत खराब

401–500 → गंभीर

आने वाले दिनों में राहत की उम्मीद कम

वायु गुणवत्ता प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के अनुसार, आने वाले दिनों में दिल्ली की हवा ‘बहुत खराब’ श्रेणी में ही रहने की संभावना है।

दिल्ली की वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए निर्णय समर्थन प्रणाली के मुताबिक, गुरुवार को राजधानी के कुल प्रदूषण में परिवहन क्षेत्र का योगदान 13.7% रहा—जो स्थानीय स्रोतों में सबसे अधिक है।

इसके अलावा NCR के पड़ोसी जिलों से भी कई हिस्सों का योगदान आया:

झज्जर: 11.8%

रोहतक: 4.3%

सोनीपत: 3.4%

गुरुग्राम: 1.2%

स्वास्थ्य पर बढ़ता खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण का बढ़ता स्तर फेफड़ों और हृदय से संबंधित बीमारियों का जोखिम बढ़ा देता है। लोगों को N95 मास्क पहनने, अनावश्यक यात्रा से बचने और बच्चों व बुजुर्गों को अधिक समय तक बाहर न रहने की सलाह दी गई है।

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