G7 समिट में कूटनीति तेज़: एस. जयशंकर ने जर्मनी, फ्रांस समेत कई देशों के विदेश मंत्रियों से की अहम बातचीत

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कनाडा में आयोजित जी-7 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान भारत की कूटनीतिक सक्रियता पूरी तरह दिखी।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस मौके पर फ्रांस, जर्मनी, ब्राजील और ब्रिटेन समेत कई देशों के विदेश मंत्रियों से द्विपक्षीय एवं रणनीतिक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। जयशंकर ने ब्रिटेन की विदेश सचिव यवेट कूपर से मुलाकात में भारत-यूके विजन 2035 की पुनः पुष्टि की। उन्होंने बताया कि यह साझा दृष्टिकोण आर्थिक, तकनीकी, रक्षा, जलवायु और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा देगा। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी आने वाले दशक में भारत-यूके संबंधों को मजबूत नींव पर आगे बढ़ाने में मदद करेगी।

इसके अलावा, विदेश मंत्री ने जर्मन समकक्ष जोहान वाडेफुल से मुलाकात कर भारत-यूरोपीय संघ संबंधों को और प्रगाढ़ करने पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया, अफगानिस्तान और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिति पर विचार साझा किए। जयशंकर ने कहा कि “हमारी रणनीतिक साझेदारी पर सकारात्मक चर्चा हुई और वैश्विक चुनौतियों के समाधान पर सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर सहमति बनी।”

फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां-नोएल बरोट के साथ मुलाकात में जयशंकर ने दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी की प्रगति का आकलन किया। उन्होंने कहा कि भारत और फ्रांस बहुपक्षीय मंचों पर अपने सहयोग को और गहरा करेंगे।

ब्राज़ील के विदेश मंत्री मौरो विएरा के साथ हुई बातचीत में दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य और तकनीकी सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा की। जयशंकर ने कहा कि “भारत और ब्राज़ील के बीच संबंध नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहे हैं।”

विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, जयशंकर 11 से 13 नवंबर तक कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के निमंत्रण पर जी-7 बैठक में शामिल हुए। उनकी भागीदारी का उद्देश्य वैश्विक चुनौतियों के समाधान और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ग्लोबल साउथ की आवाज़ को मजबूत करना है।

इस सम्मेलन में जी-7 देशों — कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ — के साथ-साथ भारत, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, सऊदी अरब, मैक्सिको, दक्षिण कोरिया, दक्षिण अफ्रीका और यूक्रेन जैसे कई आउटरीच देशों के विदेश मंत्री शामिल हुए।

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