ताजमहल के पास यमुना का बढ़ता जलस्तर: खतरा या सुरक्षा का वरदान?
आगरा में यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे ताजमहल के पीछे के पार्क में पानी भर गया है और क्षेत्र में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। भारी बारिश और नदी में पानी की अधिकता ने विश्व धरोहर स्थल की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय प्रशासन और पुरातत्व विभाग सतर्क हैं और नदी के किनारों पर निगरानी बढ़ा दी गई है।
यमुना और ताजमहल का संबंध गहरा है। नदी का जल ताजमहल की नींव में लगी लकड़ी को नम रखता है और संगमरमर की दीवारों को संरक्षित रखता है। हालांकि, प्रदूषित जल संगमरमर को काला कर सकता है और बाढ़ की स्थिति में आसपास की संरचनाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। वहीं, जलस्तर कम होने पर नींव की लकड़ी सूख सकती है और धूल दीवारों पर जम सकती है।
ताजमहल की नींव बेहद मजबूत है। महोगनी और आबनूस जैसी लकड़ियां पानी में भी अपनी मजबूती बनाए रखती हैं। आईआईटी रुड़की के 1990 सर्वेक्षण में भी यह पुष्टि हुई है। ताजमहल के चारों ओर बनाए गए 42 कुएं नींव को स्थिर बनाए रखते हैं।
यमुना का स्वरूप समय के साथ बदल गया है। पहले यह आगरा की जीवनरेखा थी और ताजमहल के निर्माण के दौरान नदी का प्रवाह सुंदरता और स्थिरता दोनों के लिए महत्वपूर्ण था। हाल के दशकों में जलस्तर में कमी, प्रदूषण और अवैध निर्माण के कारण नदी संकटग्रस्त हो गई है।
शाहजहां ने यमुना किनारे ताजमहल इसलिए बनवाया क्योंकि यह जगह सौंदर्य, स्थिरता और निर्माण सामग्री की उपलब्धता के लिहाज से आदर्श थी। नदी का शांत प्रवाह ताजमहल की सुंदरता और नींव की मजबूती दोनों के लिए जरूरी था।
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