UPI पर MDR को लेकर सरकार का बड़ा बयान, 96% भुगतान शुल्क के दायरे से बाहर; विदेशी प्रभाव के दावे खारिज
वित्त मंत्रालय ने यूपीआई में प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर उठ रहे सवालों और विदेशी प्रभाव के दावों को खारिज कर दिया है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यूपीआई से जुड़े नीतिगत फैसले भारत अपने हितों और जरूरतों के आधार पर स्वतंत्र रूप से लेता है।
वित्त मंत्रालय ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि 2016 में शुरुआत के बाद यूपीआई दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम पेमेंट प्रणालियों में शामिल हो चुका है। मंत्रालय के मुताबिक, इसकी सफलता भारत की अपनी नीतियों और फैसलों का परिणाम है और इसमें किसी विदेशी प्रभाव की भूमिका होने का दावा गलत है।
सरकार ने कहा कि उसका उद्देश्य आत्मनिर्भर, सुरक्षित, समावेशी और कम लागत वाला डिजिटल भुगतान ढांचा तैयार करना है। आंकड़ों के मुताबिक, यूपीआई ने इस साल अगस्त में अकेले करीब 24.5 अरब लेनदेन प्रोसेस किए।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, डिजिटल पेमेंट सिस्टम को लंबे समय तक टिकाऊ और नवोन्मेषी बनाए रखने के लिए ज्यादा मूल्य वाले लेनदेन पर मामूली शुल्क लगाने का प्रस्ताव किया गया है। हालांकि, आम ग्राहकों के लिए यूपीआई का इस्तेमाल पहले की तरह मुफ्त रहेगा।
दोस्तों या परिवार को पैसे भेजने, दुकानों पर भुगतान करने और क्यूआर कोड के जरिए पेमेंट करने जैसे सामान्य यूपीआई लेनदेन पर उपभोक्ताओं से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
पीटीआई के मुताबिक, जब एक वरिष्ठ अधिकारी से पूछा गया कि क्या सरकार एमडीआर से जुड़े इस फैसले को वापस लेने पर विचार कर रही है, तो उन्होंने कहा कि यह फैसला विचार-विमर्श के बाद लिया गया है और फिलहाल इससे पीछे हटने का कोई सवाल नहीं है।
सरकार का कहना है कि प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य यूपीआई के मौजूदा मॉडल को मजबूत करना और इसके संचालन को लंबे समय तक आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखना है।
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