ईरान में फिर गरमाया हिजाब विवाद, कट्टरपंथी सख्ती के पक्ष में; राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने उठाए सवाल

0

ईरान में अनिवार्य हिजाब को लेकर पुराना विवाद एक बार फिर तेज हो गया है।

कट्टरपंथी नेता और धर्मगुरु सार्वजनिक जगहों पर हिजाब नियमों को सख्ती से लागू करने की मांग कर रहे हैं, वहीं राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने सवाल उठाया है कि क्या कानून के जरिए लोगों के व्यवहार और धार्मिक विश्वास को बदला जा सकता है।

अमेरिका के साथ हालिया टकराव के दौरान सरकार समर्थक कार्यक्रमों और सरकारी मीडिया में कुछ महिलाओं को बिना हिजाब के देखा गया था। इससे संकेत मिले कि सुरक्षा और दूसरे अहम मुद्दों के बीच प्रशासन हिजाब नियमों के सख्त प्रवर्तन से बच रहा था। हालांकि, हाल के हफ्तों में रूढ़िवादी नेताओं का दबाव बढ़ने के साथ कार्रवाई भी तेज हुई है।

कैफे-रेस्तरां और दुकानों पर कार्रवाई

मानवाधिकार समूह HRANA के मुताबिक, 19 जुलाई को तेहरान में कम से कम सात कैफे और रेस्तरां कथित तौर पर अनिवार्य हिजाब नियमों का पालन नहीं कराने के आरोप में बंद किए गए। समूह ने ड्रेस कोड के कथित उल्लंघन के चलते कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स को ब्लॉक किए जाने की भी जानकारी दी है।

तेहरान अभियोजक कार्यालय ने कैफे, रेस्तरां और ऐसे कपड़े बेचने वाली दुकानों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है, जिन्हें अधिकारी सार्वजनिक शालीनता के अनुरूप नहीं मानते। दक्षिण खोरासान प्रांत में भी सामाजिक मानदंडों और अनिवार्य हिजाब के कथित उल्लंघन के आरोप में 10 कैफे बंद किए जाने की जानकारी सामने आई है।

महसा अमिनी की मौत के बाद भी जारी है विरोध

हिजाब को लेकर मौजूदा सख्ती महसा अमिनी की पुलिस हिरासत में मौत के करीब चार साल बाद बढ़ी है। अमिनी को कथित तौर पर ड्रेस कोड के उल्लंघन के आरोप में हिरासत में लिया गया था। उनकी मौत के बाद देशभर में ‘वुमन, लाइफ, फ्रीडम’ आंदोलन शुरू हुआ, जिसे सुरक्षा बलों ने कड़े तरीके से दबा दिया था।

इसके बावजूद खासकर युवा महिलाओं के बीच अनिवार्य हिजाब नियमों की अनदेखी जारी रही है। हाल के वर्षों में बिना हिजाब सार्वजनिक रूप से दिखाई देने वाली महिलाओं और कलाकारों के खिलाफ कार्रवाई के कई मामले सामने आए हैं।

पेजेश्कियान ने सख्ती पर उठाए सवाल

राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने हिजाब नियमों के कड़े प्रवर्तन को लेकर अलग रुख अपनाया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या कानून के जरिए लोगों के व्यवहार में स्थायी बदलाव लाया जा सकता है।

पेजेश्कियान ने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक मामलों में लोगों से जुड़ना ज्यादा प्रभावी हो सकता है। उन्होंने अपनी बेटी का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि क्या असहमति की स्थिति में उस पर जबरदस्ती की जानी चाहिए। उनके मुताबिक, व्यवहार में बदलाव एक सांस्कृतिक प्रक्रिया है और जबरदस्ती किसी व्यक्ति में विश्वास पैदा नहीं किया जा सकता।

कट्टरपंथी सरकार पर बना रहे दबाव

दूसरी ओर, कट्टरपंथी धड़ा हिजाब नियमों को सख्ती से लागू करने के लिए सरकार पर दबाव बढ़ा रहा है। रूढ़िवादी अखबार ‘कयहान’ के संपादक हुसैन शरीयत मदारी ने इसे सरकार की कानूनी और धार्मिक जिम्मेदारी बताया है।

संसद सदस्य मोहम्मद-तकी नकदली ने भी सार्वजनिक स्थानों पर कथित ‘नग्नता’ को देश के लिए गंभीर खतरा बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका तर्क है कि बाहरी दुश्मनों से ज्यादा देश की धार्मिक और सामाजिक संस्कृति में गिरावट नुकसान पहुंचा सकती है।

हिजाब कानून पर अभी भी जारी है विवाद

ईरान के इस्लामिक दंड संहिता के तहत सार्वजनिक स्थानों पर अनिवार्य हिजाब के बिना दिखाई देना अपराध माना जाता है, हालांकि कानून में इसकी स्पष्ट परिभाषा को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

2024 में हिजाब नियमों को और सख्त करने वाला कानून मंजूर किया गया था, जिसमें अधिक कड़ी सजा और निगरानी का प्रावधान था। हालांकि, सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के हस्तक्षेप के बाद इसके लागू होने पर रोक लगा दी गई।

इस तरह ईरान में हिजाब को लेकर सरकार और कट्टरपंथी धड़े के बीच मतभेद एक बार फिर सामने आ गए हैं—एक तरफ सख्त कानून लागू करने का दबाव है, तो दूसरी ओर राष्ट्रपति पेजेश्कियान इसे सांस्कृतिक और सामाजिक स्तर पर हल करने की वकालत कर रहे हैं।

Comments are closed.