चीनी की कीमतों में तेजी के बाद अब प्याज के दाम भी तेजी से बढ़ रहे हैं।
महाराष्ट्र की नासिक मंडी में पिछले एक महीने के दौरान प्याज के थोक भाव में करीब 76 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। कुछ राज्यों में थोक कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं, जबकि देशभर में खुदरा भाव भी करीब 19 प्रतिशत बढ़ा है।
प्याज की कीमतों में इस तेजी के पीछे मुख्य रूप से तीन वजहें बताई जा रही हैं। मानसून की अनिश्चितता के कारण खरीफ प्याज की बुआई में देरी हुई है, रबी प्याज की आवक कमजोर है और सरकारी खरीद भी निर्धारित लक्ष्य से काफी पीछे है। बाजार में स्टॉक कम होने का फायदा जमाखोरों द्वारा उठाए जाने की आशंका भी बढ़ गई है।
नासिक मंडी में एक महीने में 76% उछला भाव
नासिक मंडी में 21 अगस्त को प्याज का भाव 3,600 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर पहुंच गया। एक महीने पहले यह करीब 2,050 रुपये प्रति क्विंटल था। यानी इस अवधि में थोक कीमत में लगभग 76 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 22 अगस्त को प्याज का राष्ट्रीय औसत थोक भाव 3,397 रुपये प्रति क्विंटल रहा। इसी दिन औसत खुदरा कीमत 41.64 रुपये प्रति किलो थी, जबकि एक महीने पहले यह 34.95 रुपये प्रति किलो थी।
उत्पादन में बड़ी कमी नहीं, फिर क्यों बढ़ रहे दाम?
सरकार के मुताबिक, प्याज के उत्पादन में इस साल कोई बड़ी गिरावट नहीं आई है। पिछले वर्ष करीब 307.67 लाख टन उत्पादन हुआ था, जबकि इस बार 307.37 लाख टन उत्पादन का अनुमान है।
हालांकि, मंडियों में आवक कम होने से बाजार में उपलब्धता प्रभावित हुई है। रबी फसल का स्टॉक घट रहा है और खरीफ प्याज की नई फसल अभी बाजार में पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंची है। इस बीच मानसून की अनिश्चितता और खरीफ की बुआई में देरी ने कीमतों को लेकर चिंता और बढ़ा दी है।
सरकारी खरीद लक्ष्य से काफी पीछे
प्याज की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सरकार बफर स्टॉक तैयार करती है, लेकिन इस साल सरकारी खरीद अपेक्षा के मुताबिक नहीं हो सकी। पिछले वर्षों की तुलना में खरीद का लक्ष्य भी कम किया गया है।
इस बार दो लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य रखा गया था। मई में खरीद शुरू होने के बावजूद जुलाई के अंत तक करीब 1.20 लाख टन ही खरीदा जा सका। खुले बाजार में बेहतर कीमत मिलने के कारण किसानों ने सरकारी एजेंसियों को प्याज बेचने में ज्यादा रुचि नहीं दिखाई।
खरीद बढ़ाने के लिए सरकार ने पहले खरीद मूल्य 1,875 रुपये से बढ़ाकर 2,125 रुपये प्रति क्विंटल किया और बाद में इसे 2,645 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया। इसके बावजूद खरीद लक्ष्य से पीछे रही।
बफर स्टॉक से कितनी मिलेगी राहत?
कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार अब बफर स्टॉक को बाजार में उतारने की तैयारी कर रही है। खास तौर पर उन शहरों में इसकी आपूर्ति बढ़ाई जा सकती है, जहां खुदरा कीमतों में तेजी ज्यादा दिखाई दे रही है।
हालांकि, बफर स्टॉक सीमित होने के कारण सरकार के सामने बड़ी चुनौती है। पिछले साल भी सितंबर से बफर प्याज को खुदरा बाजार और मंडियों में उतारकर कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश की गई थी।
अगस्त-सितंबर में क्यों बढ़ते हैं प्याज के दाम?
अगस्त और सितंबर आमतौर पर प्याज की कीमतों के लिए संवेदनशील महीने होते हैं। इस दौरान रबी प्याज का भंडार धीरे-धीरे कम होता है, जबकि खरीफ फसल की नई आवक शुरू होने में समय लगता है। रबी और खरीफ फसल के बीच यही अंतर बाजार में आपूर्ति का दबाव बढ़ाता है।
इस साल खरीफ प्याज की बुआई में देरी और मौसम की अनिश्चितता ने स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। हालांकि सरकार का कहना है कि कुल उत्पादन लगभग पिछले साल के बराबर है और फिलहाल प्याज की उपलब्धता को लेकर किसी बड़े संकट की स्थिति नहीं है।
एक महीने में कीमतों में बढ़ोतरी
| राज्य | 23 अगस्त (थोक मूल्य) | 23 जुलाई (थोक मूल्य) |
| उप्र | 45-50 | 30-40 |
| झारखंड | 40-55 | 26-30 |
| दिल्ली | 45-50 | 25-30 |
| पंजाब | 40 | 25 |
| उत्तराखंड | 40 | 18 |
| हरियाणा | 50-60 | 25-35 |
| छत्तीसगढ़ | 42-45 | 20-22 |
| मध्य प्रदेश | 40 | 20 |
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