महंगे कमर्शियल गैस सिलिंडर का असर, बिहार में घटी खपत; कोयला और इंडक्शन की ओर बढ़े होटल कारोबारी
19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलिंडर की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का असर अब बिहार के होटल, रेस्तरां और खाद्य कारोबार पर साफ दिखाई देने लगा है। बढ़ती लागत के चलते कई कारोबारी गैस की जगह कोयला और इंडक्शन जैसे वैकल्पिक ईंधनों का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं। इसका असर कमर्शियल सिलिंडरों की खपत पर भी पड़ा है, जिसमें पिछले कुछ महीनों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।
फरवरी में करीब 2,010 रुपये में मिलने वाला कमर्शियल एलपीजी सिलिंडर अब 3,421 रुपये तक पहुंच गया है। यानी कुछ ही महीनों में इसकी कीमत में लगभग 70 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। बढ़ी हुई कीमतों ने छोटे और मध्यम स्तर के खाद्य कारोबारियों की लागत को काफी बढ़ा दिया है।
पटना और बिहार में खपत में बड़ी गिरावट
इंडियन ऑयल के आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी में पटना में हर महीने 32,305 कमर्शियल सिलिंडरों की खपत होती थी, जो अब घटकर 23,742 रह गई है। यह करीब 26.5 प्रतिशत की कमी दर्शाता है।
वहीं पूरे बिहार में कमर्शियल एलपीजी सिलिंडरों की खपत 68,729 से घटकर 44,596 पर पहुंच गई है। यानी राज्य स्तर पर लगभग 35 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
कोयले और इंडक्शन की ओर बढ़ रहा रुझान
राजधानी पटना के कई होटल और रेस्तरां संचालकों का कहना है कि गैस की बढ़ती कीमतों ने उन्हें वैकल्पिक साधन अपनाने के लिए मजबूर कर दिया है।
राजीव नगर स्थित एक रेस्तरां संचालक के मुताबिक, पहले उनके यहां हर महीने 20 से 30 गैस सिलिंडर खर्च होते थे, लेकिन अब कोयले की भट्ठी के इस्तेमाल के कारण महीने में केवल दो सिलिंडरों की जरूरत पड़ रही है।
इसी तरह कई रेस्तरां संचालकों का कहना है कि रसोई में अब इंडक्शन और कोयले का उपयोग बढ़ाया जा रहा है ताकि परिचालन लागत को नियंत्रित रखा जा सके। फिलहाल ग्राहकों पर बोझ कम रखने के लिए मेन्यू की कीमतों में बड़ा बदलाव नहीं किया गया है, हालांकि डिस्काउंट और ऑफर में कटौती की गई है।
ग्राहकों की संख्या पर भी असर
व्यवसायियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई का असर ग्राहकों की संख्या पर भी पड़ रहा है। कुछ प्रतिष्ठानों के अनुसार, ग्राहक संख्या में 15 से 20 प्रतिशत तक की कमी आई है। वहीं जिन व्यंजनों को गैस पर ही तैयार करना पड़ता है, वहां अभी भी बड़ी संख्या में सिलिंडरों का इस्तेमाल जारी है।
मिठाई और स्नैक्स कारोबार से जुड़े कई दुकानदारों ने भी सिलिंडर की खपत कम कर दी है। उनका कहना है कि गैस के साथ-साथ खाद्य तेल, दूध और अन्य कच्चे माल की बढ़ती कीमतों ने कारोबार की लागत को काफी बढ़ा दिया है।
मेन्यू महंगा होने की आशंका
रेस्तरां संचालकों का कहना है कि यदि कमर्शियल गैस की कीमतों में राहत नहीं मिली तो आने वाले समय में खाने-पीने की वस्तुओं के दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं। कुछ प्रतिष्ठान पहले ही मेन्यू कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी पर विचार कर रहे हैं।
कारोबारियों का मानना है कि लागत और ग्राहकों की क्रय क्षमता के बीच संतुलन बनाना अब उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
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