भारत-चीन समेत 54 देशों पर अतिरिक्त टैरिफ का अमेरिकी प्रस्ताव, वैश्विक व्यापार में बढ़ सकती है हलचल
अमेरिका ने वैश्विक व्यापार को प्रभावित करने वाला एक बड़ा प्रस्ताव पेश किया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने भारत, चीन समेत 54 देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने का सुझाव दिया है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक सप्लाई चेन पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कदम उन देशों पर दबाव बनाने के लिए उठाया जा रहा है, जहां जबरन श्रम या बंधुआ मजदूरी से जुड़े उत्पादों की आपूर्ति को रोकने के लिए पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई है। अमेरिका का आरोप है कि कई देशों की सप्लाई चेन में ऐसे उत्पाद शामिल हैं, जिनके निर्माण में जबरन श्रम का इस्तेमाल होने की आशंका है।
चीन की सप्लाई चेन पर विशेष फोकस
USTR की रिपोर्ट में चीन का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, कपास और पॉलीसिलिकॉन से जुड़ी कुछ सप्लाई चेन में जबरन श्रम के संकेत मिले हैं। चूंकि इन कच्चे मालों का उपयोग विभिन्न देशों में तैयार होने वाले उत्पादों में किया जाता है, इसलिए जांच का दायरा कई देशों तक फैल गया है।
अमेरिका का मानना है कि वैश्विक आपूर्ति नेटवर्क के जरिए ऐसे उत्पाद उसके बाजार तक पहुंच रहे हैं, जिससे घरेलू उद्योग और श्रम मानकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
कई प्रमुख सेक्टर हो सकते हैं प्रभावित
प्रस्तावित अतिरिक्त टैरिफ का असर स्टील, एल्युमिनियम, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि उत्पादों जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर पड़ सकता है। ये ऐसे सेक्टर हैं जिनमें अमेरिका बड़ी मात्रा में आयात करता है और जहां वैश्विक सप्लाई चेन की भूमिका महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह शुल्क लागू किया जाता है, तो कई देशों के निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा करना महंगा हो सकता है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक संबंधों में भी तनाव बढ़ने की आशंका है।
भारत ने आरोपों को किया खारिज
अमेरिकी प्रस्ताव पर भारत ने आपत्ति जताई है। भारतीय पक्ष ने जबरन श्रम से जुड़े आरोपों को खारिज करते हुए जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। भारत का कहना है कि उसके निर्यात मानकों और श्रम कानूनों को लेकर लगाए गए आरोप तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ बातचीत जारी है। दोनों देश सेक्शन 301 प्रक्रिया के तहत संवाद कर रहे हैं और व्यापारिक मतभेदों को सुलझाने के लिए एक व्यापक द्विपक्षीय ढांचे पर भी काम कर रहे हैं।
फिलहाल यह प्रस्ताव विचाराधीन है, लेकिन इसने वैश्विक व्यापार जगत में नई बहस छेड़ दी है। आने वाले समय में अमेरिका का अंतिम फैसला कई देशों की निर्यात रणनीति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
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