दिल्ली की हवा में सबसे ज्यादा पारा, स्वास्थ्य पर मंडरा रहा बड़ा खतरा
राष्ट्रीय राजधानी की हवा सिर्फ धूल और धुएँ से ही नहीं, बल्कि खतरनाक धातु पारे से भी भरी हुई है। हालिया अध्ययन के अनुसार, दिल्ली में पारे का स्तर पूरे दक्षिण एशिया में सबसे ऊँचा है।
पुणे स्थित भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) ने छह साल तक दिल्ली, अहमदाबाद और पुणे में हवा की गुणवत्ता पर शोध किया। इसमें सामने आया कि दिल्ली की हवा में पारे का स्तर 6.9 नैनोग्राम प्रति घन मीटर है, जबकि अहमदाबाद में यह 2.1 और पुणे में सिर्फ 1.5 नैनोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। यह स्तर वैश्विक औसत से करीब 13 गुना अधिक है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, पारे का 70–90% हिस्सा मानवीय गतिविधियों से आता है – खासकर कोयला जलाने, वाहनों के धुएँ और औद्योगिक प्रदूषण से। सर्दियों और रात के समय यह स्तर और तेजी से बढ़ जाता है।
विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि लंबे समय तक पारे का संपर्क बेहद खतरनाक है। यह तंत्रिका तंत्र, गुर्दे, फेफड़े और हृदय को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी पारे को जनस्वास्थ्य के लिए सबसे खतरनाक 10 रसायनों में शामिल किया है।
हालाँकि, अध्ययन में यह सकारात्मक पहलू भी सामने आया कि बीते कुछ वर्षों में दिल्ली में पारे का स्तर धीरे-धीरे घट रहा है। फिर भी, विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक कोयले पर निर्भरता और प्रदूषणकारी औद्योगिक गतिविधियाँ कम नहीं होंगी, तब तक हालात में बड़ा सुधार मुश्किल है।
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