महाराष्ट्र में अब मराठी भाषा को लेकर सख्ती बढ़ा दी गई है। राज्य में जो स्कूल मराठी को अनिवार्य विषय के तौर पर नहीं पढ़ाएंगे, उन्हें भारी जुर्माने से लेकर मान्यता रद्द होने तक की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
स्कूल शिक्षा विभाग ने शुक्रवार को जारी एक सरकारी संकल्प (जीआर) में स्पष्ट किया है कि सभी स्कूलों में मराठी का अनिवार्य शिक्षण हर हाल में लागू किया जाएगा। यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि कई स्कूल—खासतौर पर केंद्रीय बोर्डों से जुड़े संस्थान—इस नियम का पालन नहीं कर रहे थे।
जीआर के मुताबिक, नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही, लगातार अवहेलना की स्थिति में उनकी मान्यता भी रद्द की जा सकती है।
महाराष्ट्र अनिवार्य मराठी भाषा शिक्षण अधिनियम, 2020 के तहत शैक्षणिक सत्र 2020-21 से कक्षा 1 से 10 तक मराठी को अनिवार्य विषय बनाया गया है। यह नियम सभी स्कूलों पर लागू है, चाहे वे किसी भी बोर्ड या माध्यम से संचालित हों।
सरकार ने इसके सख्त अनुपालन के लिए निगरानी तंत्र भी तय किया है। संभागीय उप शिक्षा निदेशकों को इस नियम के पालन की जिम्मेदारी दी गई है। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के दो महीने के भीतर स्कूलों का निरीक्षण किया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मराठी पढ़ाई जा रही है या नहीं।
यदि किसी स्कूल में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो उसे नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर जवाब देने को कहा जाएगा। जवाब संतोषजनक न होने पर आगे की कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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