नेपाल की सियासत में बड़ा उलटफेर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गगन थापा के नेतृत्व वाले गुट को ही आधिकारिक नेपाली कांग्रेस के रूप में मान्यता दे दी है। इस फैसले को पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
न्यायमूर्ति सारंगा सुबेदी और न्यायमूर्ति नृपा ध्वज निरौला की खंडपीठ ने शुक्रवार को यह फैसला सुनाते हुए चुनाव आयोग के उस निर्णय को सही ठहराया, जिसमें थापा के नेतृत्व वाली केंद्रीय कार्य समिति (CWC) को वैध माना गया था।
क्या था विवाद?
विवाद की शुरुआत जनवरी में काठमांडू में आयोजित विशेष आम सम्मेलन से हुई थी, जहां गगन थापा को पार्टी अध्यक्ष चुना गया। देउबा गुट ने इस सम्मेलन और उसके नतीजों को चुनौती दी थी।
देउबा और कार्यवाहक अध्यक्ष पूर्ण बहादुर खड़का का तर्क था कि यह प्रक्रिया पार्टी संविधान और नियमों के खिलाफ है। उनका कहना था कि थापा गुट को दी गई मान्यता असंवैधानिक और अवैध है।
कोर्ट पहुंचा मामला
चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ देउबा गुट ने 18 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिका में विशेष आम सम्मेलन की वैधता और थापा की अध्यक्षता दोनों पर सवाल उठाए गए थे।
कोर्ट का क्या कहना है?
सुप्रीम कोर्ट ने सभी दलीलों को खारिज करते हुए चुनाव आयोग के फैसले को बरकरार रखा। इसके साथ ही थापा के नेतृत्व वाले गुट को ही पार्टी का वैध प्रतिनिधित्व मान लिया गया।
इस फैसले के बाद नेपाली कांग्रेस के अंदर शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल गया है और पार्टी की कमान अब औपचारिक रूप से थापा के हाथ में मानी जा रही है।
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