नेपाल ने बाढ़ राहत के लिए विदेशी मदद को दी मंजूरी, भारत की टीमें रवाना होने को तैयार

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नेपाल में भीषण बाढ़ से हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं।

शुरुआती दौर में विदेशी राहत और बचाव टीमों को अनुमति नहीं देने के बाद अब नेपाल सरकार ने अपना रुख बदल लिया है। प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व वाली सरकार ने सीमित संख्या में विदेशी विशेषज्ञों और खोज-बचाव टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में काम करने की मंजूरी दे दी है।

यह फैसला उन देशों के बढ़ते दबाव के बीच लिया गया है, जिनके नागरिक बाढ़ प्रभावित इलाकों में लापता हैं। नेपाल सरकार अब ऐसे विदेशी विशेषज्ञों को अनुमति दे रही है, जिनकी मदद से खोज-बचाव अभियान और शवों की पहचान में तेजी लाई जा सके।

भारत भेज रहा टनल रेस्क्यू टीम

भारत ने नेपाल के अनुरोध पर तुरंत मदद की पेशकश की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल के अनुसार, भारत नेपाल में टनल रेस्क्यू टीम भेजने की तैयारी कर रहा है। इससे पहले एक सर्वे टीम भेजी जा रही है, जो मौके पर स्थिति का आकलन करेगी और बचाव अभियान के लिए जरूरी उपकरणों की पहचान करेगी।

भारत की ओर से एक चिकित्सा टीम भी भेजी जा रही है। इसके अलावा प्रभावित क्षेत्रों में संपर्क और कनेक्टिविटी बहाल करने के लिए भारत ने बेली ब्रिज और तकनीकी विशेषज्ञों की टीमें उपलब्ध कराने की पेशकश की है। एक बेली ब्रिज पहले से ही नेपाल में मौजूद है।

क्यों बदलना पड़ा नेपाल को फैसला?

काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित इलाकों में विदेशी नागरिकों के लापता होने के बाद संबंधित देशों की ओर से नेपाल सरकार पर दबाव बढ़ रहा था। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से लगातार अनुरोध किया जा रहा था कि कम से कम खोज-बचाव विशेषज्ञों और तकनीकी टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में जाने की अनुमति दी जाए।

रसुवा और नुवाकोट में हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में कई लोगों के फंसे या लापता होने की खबर है। स्थानीय स्तर पर चल रहे बचाव अभियान में सीमित प्रगति और सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए विशेष विशेषज्ञता की जरूरत ने भी नेपाल के फैसले को प्रभावित किया।

इसके अलावा नेपाल में डीएनए जांच और फॉरेंसिक पहचान की सीमित क्षमता के कारण विदेशी विशेषज्ञों की मदद लेने की जरूरत महसूस हुई है। ये विशेषज्ञ बरामद शवों की पहचान और फॉरेंसिक प्रक्रिया में स्थानीय एजेंसियों की सहायता कर सकते हैं।

भारत ने भेजी तीसरी खेप

भारत ने नेपाल को मानवीय सहायता की तीसरी खेप भी भेजी है। करीब 10 टन की इस खेप में पोर्टेबल जनरेटर, डिग्निटी किट, खाद्य पैकेट और जल शुद्धीकरण टैबलेट शामिल हैं।

इसी उड़ान के जरिए 11 सदस्यीय टीम भी नेपाल पहुंची, जिसमें डॉक्टर, पैरामेडिक और टनल रेस्क्यू विशेषज्ञ शामिल हैं। 26 अगस्त से अब तक भारत की ओर से नेपाल को भेजी गई कुल राहत सामग्री 57.5 टन हो चुकी है।

नेपाल में राहत और बचाव अभियान अभी भी जारी है और विदेशी विशेषज्ञों की सीमित मदद मिलने से सुरंगों तथा दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों की तलाश में तेजी आने की उम्मीद है।

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