सरकारी उपायों के बावजूद प्याज की बढ़ती कीमतों पर फिलहाल लगाम नहीं लग पाई है।
थोक बाजार में मांग कम होने और आपूर्ति पर्याप्त रहने से स्थिति कुछ हद तक नियंत्रण में है, लेकिन खुदरा बाजार में प्याज के भाव तेजी से बढ़ रहे हैं। नासिक में पुराने स्टॉक की कमी को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है।
दिल्ली-NCR में प्याज 50-55 रुपये किलो के भाव पर बिक रहा है, जबकि खुले बाजार में इसकी कीमत 60-70 रुपये किलो तक पहुंच गई है। कुछ राज्यों में खुदरा भाव 80 रुपये किलो तक पहुंच चुका है।
कानपुर की चकरपुर मंडी में प्याज की दैनिक आवक पिछले कुछ दिनों में घटकर करीब 5 लाख किलो रह गई है। पहले यहां रोजाना करीब 6.50 लाख किलो प्याज पहुंचता था। आवक घटने से थोक कीमत 42-45 रुपये किलो हो गई है, जबकि बुधवार को यह 35-40 रुपये किलो थी। मंडी व्यापारियों के अनुसार, महज तीन दिनों में भाव करीब 10 रुपये किलो बढ़े हैं।
फिलहाल मध्य प्रदेश के शिवपुरी और राजस्थान के अलवर से सीमित मात्रा में प्याज की आपूर्ति हो रही है। कारोबारियों का कहना है कि नई फसल बाजार में आने तक कीमतों में तेजी बनी रह सकती है।
आगरा की सिकंदरा मंडी में नासिक से रोजाना करीब 15 ट्रक यानी लगभग तीन लाख किलो प्याज पहुंच रहा है। यहां थोक भाव फिलहाल करीब 40 रुपये किलो है। आढ़तियों के मुताबिक, अगले सप्ताह मांग बढ़ने पर कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
अन्य राज्यों में भी प्याज के दाम बढ़े हैं। बंगाल में दो सप्ताह पहले 30-35 रुपये किलो बिकने वाला प्याज अब 70-80 रुपये किलो तक पहुंच गया है। राजस्थान में भाव करीब 50 रुपये, जम्मू और देहरादून में 60 रुपये किलो तक हैं। हरिद्वार की ज्वालापुर मंडी में प्याज करीब 50 रुपये किलो बिक रहा है।
हल्द्वानी में प्याज 46-50 रुपये किलो, रुद्रपुर में 35-40 रुपये और पटना में करीब 55 रुपये किलो बिक रहा है। रांची में खुदरा भाव 55-60 रुपये किलो है। हिमाचल प्रदेश में प्याज की औसत कीमत करीब 60 रुपये किलो, जबकि मध्य प्रदेश की मंडियों में घरेलू इस्तेमाल वाला प्याज करीब 40 रुपये किलो बिक रहा है।
कारोबारियों के मुताबिक, आपूर्ति में कमी और पुराने स्टॉक के घटने से आने वाले दिनों में प्याज की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
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