तीन बेबी फूड उत्पादों को लेकर नेस्ले से जवाब तलब, FSSAI ने मांगा स्पष्टीकरण

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शिशु आहार उत्पादों पर FSSAI की कार्रवाई, नेस्ले इंडिया से मांगा जवाब; कंपनी ने नियमों के पालन का किया दावा

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर नेस्ले इंडिया के तीन शिशु आहार उत्पादों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू की है। नियामक ने कंपनी से इस मामले में स्पष्टीकरण भी मांगा है।

नेस्ले इंडिया ने हालांकि कहा है कि उसके बच्चों के पोषण से जुड़े सभी उत्पाद लागू नियमों के अनुरूप हैं। कंपनी ने यह भी कहा कि वह इस मामले में FSSAI के साथ सहयोग कर रही है।

कार्रवाई की खबर सामने आने के बाद शुक्रवार को बीएसई पर नेस्ले इंडिया के शेयर में भी गिरावट देखी गई। कारोबार के अंत में कंपनी का शेयर 1.4 प्रतिशत टूटकर 1,353.10 रुपये पर बंद हुआ।

तीन उत्पादों पर उठे सवाल

FSSAI की कार्रवाई एनएएन एक्सेला प्रो स्टेज-1, लैक्टोजेन प्रो-1 और एक अन्य फॉलो-अप फॉर्मूला उत्पाद से जुड़ी है। नियामक के अनुसार, एनएएन एक्सेला प्रो स्टेज-1 में 5एचएमओ और व्हे प्रोटीन से संबंधित दावों को लेकर आपत्ति सामने आई है। वहीं, लैक्टोजेन प्रो-1 पर व्हे प्रोटीन को आसानी से पचने योग्य बताए जाने संबंधी दावे की भी जांच की गई।

नियामक ने इन उत्पादों के नमूनों की जांच के साथ ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध प्रचार सामग्री का भी परीक्षण किया। FSSAI के अनुसार, उत्पादों के नमूनों और प्रचार सामग्री के बीच अंतर पाया गया है।

इन मामलों को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (फूड फॉर इन्फैंट न्यूट्रिशन) रेगुलेशन, 2020 के रेगुलेशन 4(2) के तहत देखा जा रहा है। यह प्रावधान शिशु आहार उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के उद्देश्य से किए जाने वाले कुछ प्रचार और दावों को नियंत्रित करता है।

FSSAI ने 1992 के संबंधित कानून की धारा 3 का भी हवाला दिया है, जो ऐसे उत्पादों के विज्ञापन और प्रचार से जुड़े प्रावधानों से संबंधित है।

पैराडाइज डिस्टिलरीज का लाइसेंस भी निलंबित

खाद्य नियामक ने पैराडाइज डिस्टिलरीज के परिसर में गंभीर नियम उल्लंघन पाए जाने के बाद कंपनी का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से 15 दिनों के लिए निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई भी खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन से जुड़ी है।

2015 में मैगी को लेकर भी हुई थी कार्रवाई

नेस्ले इंडिया को इससे पहले 2015 में मैगी इंस्टेंट नूडल्स को लेकर FSSAI की कार्रवाई का सामना करना पड़ा था। उस समय लेड की कथित अधिक मात्रा और लेबलिंग से जुड़ी चिंताओं के चलते मैगी को देशभर से वापस लेने का आदेश दिया गया था।

बाद में अधिकृत प्रयोगशालाओं में जांच के बाद प्रतिबंध हटाया गया और मैगी की दोबारा बाजार में बिक्री शुरू हुई।

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