पश्चिम बंगाल में 933 सरकारी स्कूलों पर लगा ताला, शून्य नामांकन के बाद सरकार तलाशेगी दोबारा खोलने की राह

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पश्चिम बंगाल में शून्य छात्र नामांकन वाले 933 सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों को बंद कर दिया गया है।

अब राज्य सरकार इन स्कूलों और उनकी संपत्तियों का भौतिक सत्यापन कराएगी। इसके आधार पर बंद स्कूलों को दोबारा शुरू करने या उनके भवन, जमीन और अन्य संसाधनों के वैकल्पिक उपयोग की संभावनाएं तलाशने का फैसला लिया जाएगा।

स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में 16 सितंबर को राज्य के सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किया है। प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति गठित की जाएगी, जो शून्य नामांकन वाले स्कूलों का निरीक्षण करेगी। जिला शिक्षा अधिकारी और जिला विद्यालय निरीक्षक समिति के सदस्य होंगे।

स्कूलों की जमीन और सुविधाओं का होगा आकलन

निरीक्षण के दौरान समितियां स्कूल भवन, कक्षाओं, जमीन, उपलब्ध सुविधाओं और अन्य संपत्तियों की स्थिति की जांच करेंगी। इसके अलावा संपत्तियों के स्वामित्व, बुनियादी सुविधाओं और स्कूल तक पहुंच की स्थिति का भी आकलन किया जाएगा। यह भी देखा जाएगा कि कौन-सा बुनियादी ढांचा पूरी तरह अनुपयोगी है या उसका इस्तेमाल बहुत कम हो रहा है।

स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन के मुताबिक, राज्य में यह समस्या पिछले करीब 20 वर्षों से बनी हुई है, जबकि पिछले पांच वर्षों में स्थिति और गंभीर हुई है। उन्होंने बताया कि बंद किए गए 933 स्कूलों में प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के संस्थान शामिल हैं। सरकार इन स्कूलों में तैनात रहे शिक्षकों की संख्या का भी आकलन कर रही है।

बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इस पर जोर

समितियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि स्कूलों के पुनर्गठन या किसी अन्य फैसले के कारण कोई बच्चा शिक्षा की सुविधा से वंचित न हो। जिलों से प्रत्येक स्कूल की स्थिति और उसके संभावित पुनर्जीवन या वैकल्पिक उपयोग को लेकर सिफारिश सहित समेकित रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर मांगी गई है।

विभाग ने स्कूलों की संपत्तियों के सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत इस्तेमाल की संभावना भी सामने रखी है। हालांकि, मंत्री दीपक बर्मन ने स्पष्ट किया है कि सरकार स्कूल की संपत्तियों को पूरी तरह PPP मॉडल के हवाले करने के पक्ष में नहीं है।

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