अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में 74 हजार पन्नों की चार्जशीट, ट्रस्ट पदाधिकारियों को क्लीन चिट; तीन बने गवाह

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बहुचर्चित श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस ने जेल में बंद आठ आरोपितों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है।

90 दिन की निर्धारित अवधि पूरी होने पर बुधवार को बाराबंकी के एएसपी रितेश कुमार सिंह और मामले के विवेचक सीओ अयोध्या आशुतोष तिवारी 73,480 पन्नों की चार्जशीट चार बड़े बक्सों में लेकर अदालत पहुंचे।

पुलिस के अनुसार, जांच में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और संबंधित बैंक को आरोपों से बाहर रखा गया है। वहीं, पूर्व महासचिव चंपतराय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र और मंदिर के पूर्व व्यवस्था प्रमुख गोपाल राव को सरकारी गवाह बनाया गया है। पुलिस ने मंदिर से कीमती आभूषण गायब होने की बात को भी खारिज किया है।

105 घटनाओं और 173 गवाहों का जिक्र

चार्जशीट के 59 पन्नों में मामले के प्रमुख तथ्यों का उल्लेख किया गया है, जबकि बाकी दस्तावेजों में जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्य, आरोपितों और गवाहों के बयान शामिल हैं।

पुलिस के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज की जांच में चोरी से जुड़ी 105 घटनाओं का उल्लेख मिला है। मामले में 173 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं। जांच एजेंसियों ने सर्विलांस के जरिए आरोपितों के बीच हुए करीब 3,300 संदेश भी जुटाए हैं।

चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद 25 जून को ट्रस्ट सदस्य कृष्णमोहन की शिकायत और एसआईटी की सिफारिश पर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र, अविनाश शुक्ल और सेवानिवृत्त बैंककर्मी सुभाष श्रीवास्तव के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।

अनुकल्प मिश्र को बताया गया मुख्य साजिशकर्ता

चार्जशीट में पुलिस ने अनुकल्प मिश्र को कथित तौर पर मुख्य साजिशकर्ता बताया है। जांच के अनुसार, वह अन्य लोगों के जरिए चोरी करवाता था और चोरी की रकम का कथित बंटवारा जनौरा के पास हाईवे के नजदीक एक बाग में किया जाता था।

जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि अनुकल्प ने अपने बहनोई लवकुश को मंदिर में नौकरी दिलवाई थी। वहीं, चंपतराय के चालक रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास बिना किसी लिखित आदेश के दानपात्रों की चाबियां होने का भी उल्लेख चार्जशीट में किया गया है।

पुलिस के मुताबिक, टिन्नू श्रद्धालुओं को दर्शन कराने के नाम पर पैसे लेता था। इसके अलावा वह वाहनों को किराये पर चलवाता था और इससे करीब 90 हजार रुपये प्रतिमाह कमाता था।

किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?

एफआईआर में आपराधिक न्यासभंग, चोरी की संपत्ति को रखने या उसके निस्तारण में मदद करने, आपराधिक साजिश और साझा मंशा से अपराध करने से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं।

धारा 316(5) सौंपी गई धनराशि या संपत्ति के कथित गबन या दुरुपयोग से संबंधित है और इसमें आजीवन कारावास या 10 वर्ष तक की सजा तथा जुर्माने का प्रावधान बताया गया है।

धारा 317(4) और 317(5) चोरी या गबन की संपत्ति को जानबूझकर रखने, छिपाने या उसके निस्तारण में सहायता करने से जुड़ी हैं। इन धाराओं में तीन से सात वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। वहीं, धारा 61 आपराधिक साजिश और धारा 3(5) साझा मंशा के तहत सामूहिक आपराधिक जिम्मेदारी से संबंधित है।

चार्जशीट में दर्ज आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और अदालत में इनका परीक्षण होना बाकी है।

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