पेपर लीक और OSM विवाद पर संसदीय समिति सख्त, NTA और CBSE से मांगा विस्तृत जवाब
शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी संसदीय समिति ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से यह स्पष्ट करने को कहा है कि उसकी परिभाषा में “पेपर लीक” किसे माना जाता है। समिति ने यह भी जानना चाहा है कि वर्ष 2018 से अब तक आयोजित परीक्षाओं में किसी प्रश्नपत्र के लीक होने की घटना सामने आई है या नहीं।
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने पिछले सप्ताह NTA अधिकारियों की पेशी के बाद यह प्रश्नावली भेजी है। अधिकारियों ने समिति को बताया था कि उनकी प्रणाली से कोई पेपर लीक नहीं हुआ था और जिन सवालों के पहले से प्रसारित होने की बात कही गई, वे केवल “गेस पेपर” का हिस्सा थे।
समिति फिलहाल NEET-UG 2024 पेपर लीक मामले और CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम से जुड़े विवादों की जांच कर रही है। इसी क्रम में NTA और CBSE से विस्तृत लिखित जवाब मांगे गए हैं।
समिति ने NTA से पूछा है कि क्या उसने NEET-UG 2024 में कथित अनियमितताओं की जांच CBI जांच के अलावा किसी अन्य स्तर पर भी कराई थी। इसके साथ ही पिछले तीन वर्षों में कर्मचारियों की संख्या, 2022 के बाद की गई भर्तियों और उच्च शिक्षा विभाग को सौंपी गई वार्षिक रिपोर्टों की प्रतियां भी मांगी गई हैं।
इसके अलावा, समिति ने पूर्व ISRO प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति की 101 सिफारिशों पर NTA द्वारा की गई कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा भी तलब किया है। केंद्र सरकार ने जून 2024 में इस समिति का गठन परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, निष्पक्षता और डेटा सुरक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से किया था।
वहीं, CBSE से OSM प्रणाली के लिए जारी विभिन्न रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) में कथित बदलावों को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। समिति ने यह भी पूछा है कि अनुबंध देने से पहले संबंधित कंपनी की पृष्ठभूमि की जांच की गई थी या नहीं।
सूत्रों के अनुसार, समिति ने CBSE से यह भी जानना चाहा है कि क्या उसे इस बात की जानकारी थी कि कोएम्प्ट एडुटेक या उसके निदेशक पहले ग्लोबरेना टेक्नोलॉजीज से जुड़े रहे थे, जिसके मूल्यांकन सॉफ्टवेयर में 2019 के तेलंगाना इंटरमीडिएट परीक्षा परिणामों के दौरान खामियां सामने आई थीं।
इसके अलावा, समिति ने सवाल उठाया है कि तीसरे RFP में खराब प्रदर्शन का रिकॉर्ड रखने वाले बोलीदाताओं को अयोग्य ठहराने वाले प्रावधान को क्यों हटाया गया। साथ ही, पहले से ब्लैकलिस्ट किए गए बोलीदाताओं पर प्रतिबंध संबंधी शर्तों को क्यों नरम किया गया और न्यूनतम टर्नओवर की सीमा 50 करोड़ रुपये क्यों निर्धारित की गई।
समिति ने यह भी पूछा है कि उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग के लिए निर्धारित न्यूनतम रिजोल्यूशन 300 DPI से घटाकर 200 DPI क्यों किया गया।
सूत्रों के मुताबिक, CBSE को 8 जून और NTA को 10 जून तक अपने लिखित जवाब सौंपने हैं। हालांकि अब तक किसी भी एजेंसी ने समिति को जवाब नहीं भेजा है।
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