पेट्रोल-डीजल अपडेट: प्रीमियम ईंधन हुआ महंगा, क्या आम पेट्रोल-डीजल के दाम भी बढ़े? जानें लेटेस्ट रेट्स
पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर पिछले कई दिनों से जताई जा रही आशंका अब सच साबित हो गई है।
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच देश में ईंधन के कुछ सेगमेंट महंगे हो गए हैं। हालांकि, आम उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल राहत बरकरार है।
शुक्रवार को प्रीमियम (हाई-ग्रेड) पेट्रोल की कीमत में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। वहीं, इंडस्ट्रियल या बल्क डीजल की कीमतों में 20 से 22 रुपये प्रति लीटर तक का बड़ा इजाफा हुआ है। लेकिन राहत की बात यह है कि नॉर्मल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
प्रीमियम और इंडस्ट्रियल फ्यूल महंगे
दिल्ली में 95 ऑक्टेन प्रीमियम पेट्रोल की कीमत 99.89 रुपये से बढ़कर 101.89 रुपये प्रति लीटर हो गई है। वहीं इंडस्ट्रियल डीजल 87.67 रुपये से बढ़कर 109.59 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है।
अन्य महानगरों में भी यही ट्रेंड देखने को मिला—मुंबई में यह 90.39 रुपये से बढ़कर 113.11 रुपये, कोलकाता में 92.30 रुपये से 114.27 रुपये और चेन्नई में 92.54 रुपये से बढ़कर 113.38 रुपये प्रति लीटर हो गया है।
नॉर्मल पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर
आम लोगों के लिए राहत जारी है। दिल्ली में नॉर्मल पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है। अधिकारियों के अनुसार, प्रीमियम पेट्रोल का कुल खपत में हिस्सा केवल 2 से 4 प्रतिशत है, इसलिए इसका सीधा असर आम आदमी पर नहीं पड़ेगा। फिलहाल नॉर्मल ईंधन के दाम बढ़ाने की कोई योजना नहीं है।
क्यों बढ़ी कीमतें?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी इसका मुख्य कारण है। हाल ही में कीमतें 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, जो बाद में घटकर करीब 108 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गईं।
ईरान से जुड़े तनाव और स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज़ में बढ़ते जोखिम के चलते सप्लाई चेन प्रभावित हुई है—जहाजों के रूट बदल रहे हैं, बीमा महंगा हुआ है और लागत बढ़ी है। भारत अपनी लगभग 88 प्रतिशत तेल जरूरत आयात से पूरी करता है, जिसका बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है।
कैसे तय होती हैं कीमतें?
पेट्रोल और डीजल की कीमतें अब पूरी तरह बाजार आधारित हैं। डी-रेगुलेशन के बाद तेल विपणन कंपनियां—इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल—कीमतें तय करती हैं। इसके बावजूद, अप्रैल 2022 से आम ईंधन की कीमतों में स्थिरता बनी हुई है।
आगे क्या हो सकता है असर?
हालांकि अभी आम वाहन चालकों पर सीधा असर नहीं है, लेकिन इंडस्ट्रियल डीजल महंगा होने से लॉजिस्टिक्स और उत्पादन लागत बढ़ सकती है। इसका असर आगे चलकर महंगाई पर दिख सकता है।
फिलहाल सरकार आम उपभोक्ताओं को राहत देने के पक्ष में है, लेकिन अगर वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल आता है, तो भविष्य में कीमतों में बदलाव संभव है।
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