चीनी के दामों में अब गिरावट शुरू हो गई है, लेकिन बाजार में इसकी कीमतों को लेकर असमानता बनी हुई है।
अलग-अलग दुकानों पर चीनी अलग-अलग रेट में बिक रही है। कहीं 56 रुपये तो कहीं 58 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से चीनी बेची जा रही है। अलग-अलग कीमतों के कारण ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और कई जगह रेट को लेकर दुकानदारों व ग्राहकों के बीच कहासुनी की स्थिति भी बन रही है।
कुछ समय पहले चीनी की उपलब्धता को लेकर बाजार में आशंका का माहौल बना था। इसके चलते थोक उपभोक्ताओं और कारोबारियों ने जरूरत से अधिक चीनी खरीदकर स्टॉक कर लिया। बाजार में उपलब्ध स्टॉक कम होने के साथ ही चीनी के दाम तेजी से बढ़ने लगे। करीब डेढ़ महीने पहले 44-45 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बिकने वाली चीनी की कीमत बढ़कर करीब 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थी।
बाद में सरकार के हस्तक्षेप के बाद बाजार में स्थिति बदलने लगी। कारोबारियों के पास जमा अतिरिक्त स्टॉक अब धीरे-धीरे बाजार में आ रहा है, जबकि नई खरीदारी कमजोर पड़ने से चीनी की मांग और कीमत दोनों पर दबाव बना है। इसके चलते थोक बाजार में भाव कम हुए हैं।
हालांकि, खुदरा बाजार में अभी भी अलग-अलग कीमतें देखने को मिल रही हैं। इसकी बड़ी वजह दुकानदारों के पास मौजूद पुराना महंगा स्टॉक बताया जा रहा है। दुकानदारों का कहना है कि उन्होंने चीनी जिस भाव पर खरीदी थी, उसके मुकाबले कम कीमत पर बेचने से उन्हें नुकसान उठाना पड़ेगा। इसलिए पुराने स्टॉक को वे लागत के हिसाब से ही बेच रहे हैं।
शहर के अलग-अलग इलाकों में भी यही स्थिति देखने को मिली। भूड़ चौराहे के पास एक दुकान पर चीनी 56 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिकती मिली, जबकि चांदपुर रोड स्थित एक दुकान पर इसका भाव 58 रुपये प्रति किलोग्राम था। चौक बाजार, साठा और देवीपुरा समेत अन्य क्षेत्रों में भी चीनी की कीमतों में अंतर देखा गया।
दामों में इस अंतर को लेकर कुछ दुकानों पर ग्राहकों और विक्रेताओं के बीच बहस होने की शिकायत सामने आई। दुकानदारों का कहना है कि खुदरा कीमत थोक बाजार में खरीद के भाव के आधार पर तय की जा रही है। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि पिछले सप्ताह की तुलना में चीनी के दामों में अब कमी आई है और बाजार में कीमतें धीरे-धीरे नीचे आ रही हैं।
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